Herbs Archives - Healthy Sansaar https://healthysansaar.in/category/herbs/ SEE THE HEALTH THE WAY OUR ANCESTORS SAW Thu, 17 Jun 2021 00:28:33 +0000 en-US hourly 1 https://wordpress.org/?v=6.7.1 https://i0.wp.com/healthysansaar.in/wp-content/uploads/2020/09/cropped-HEALTHY-SANSAAR-LOGO-2.png?fit=32%2C32&ssl=1 Herbs Archives - Healthy Sansaar https://healthysansaar.in/category/herbs/ 32 32 180658306 अश्वगंधा के फायदे पुरुषों के लिए / Ashwagandha benefits for Men https://healthysansaar.in/%e0%a4%85%e0%a4%b6%e0%a5%8d%e0%a4%b5%e0%a4%97%e0%a4%82%e0%a4%a7%e0%a4%be-%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%ab%e0%a4%be%e0%a4%af%e0%a4%a6%e0%a5%87-%e0%a4%aa%e0%a5%81%e0%a4%b0%e0%a5%81%e0%a4%b7%e0%a5%8b-ashwaga/?utm_source=rss&utm_medium=rss&utm_campaign=%25e0%25a4%2585%25e0%25a4%25b6%25e0%25a5%258d%25e0%25a4%25b5%25e0%25a4%2597%25e0%25a4%2582%25e0%25a4%25a7%25e0%25a4%25be-%25e0%25a4%2595%25e0%25a5%2587-%25e0%25a4%25ab%25e0%25a4%25be%25e0%25a4%25af%25e0%25a4%25a6%25e0%25a5%2587-%25e0%25a4%25aa%25e0%25a5%2581%25e0%25a4%25b0%25e0%25a5%2581%25e0%25a4%25b7%25e0%25a5%258b-ashwaga https://healthysansaar.in/%e0%a4%85%e0%a4%b6%e0%a5%8d%e0%a4%b5%e0%a4%97%e0%a4%82%e0%a4%a7%e0%a4%be-%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%ab%e0%a4%be%e0%a4%af%e0%a4%a6%e0%a5%87-%e0%a4%aa%e0%a5%81%e0%a4%b0%e0%a5%81%e0%a4%b7%e0%a5%8b-ashwaga/#respond Fri, 21 May 2021 08:16:24 +0000 https://healthysansaar.in/?p=983 अश्वगंधा के फायदे पुरुषों के लिए ही नहीं बच्चों और महिलाओं के लिए भी है। अश्वगंधा एक आयुर्वेदिक जड़ी बूटी है | इसे औषधि के तौर पर हजारों वर्षों से इस्तेमाल किया जाता जा रहा है | चरक संहिता में  भी इसका जिक्र  है | इसका लैटिन नाम Withania somnifera Read more…

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अश्वगंधा के फायदे पुरुषों में
अश्वगंधा की जड़

अश्वगंधा के फायदे पुरुषों के लिए ही नहीं बच्चों और महिलाओं के लिए भी है। अश्वगंधा एक आयुर्वेदिक जड़ी बूटी है | इसे औषधि के तौर पर हजारों वर्षों से इस्तेमाल किया जाता जा रहा है | चरक संहिता में  भी इसका जिक्र  है | इसका लैटिन नाम Withania somnifera है | इसे winter cherry भी कहते हैं | इसकी जड़ और पत्तियों से अश्व के मूत्र जैसी गंध आती है | इस कारण इसे अश्वगंधा का नाम दिया गया |आयुर्वेद के अनुसार इसके सेवन से अश्व जैसी ताकत और यौन शक्ति मिलती है |अश्वगंधा के फायदे पुरुषों के लिए किस तरह है ,इस लेख में जानेंगे। 

भारत में यह राजस्थान , हरियाणा , उत्तर प्रदेश , गुजरात , महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश में मुख्य रूप से उपजाए जाते हैं |मध्यप्रदेश में इसकी खेती करीब 5000 acre में की जाती है |

अश्वगंधा को एडाप्टोजेन प्लांट कहते हैं | एडाप्टोजेन प्लांट अर्थात स्ट्रेस रिलीफ प्लांट | इसकी तासीर खुश्क और गर्म होती है | इसका सेवन शरीर में पित्त को बढ़ाता है तथा कफ और वात दोष को कम करता ह

अश्वगंधा के फायदे पुरुषों के लिए  /Ashwagandha benefits for men 

अश्वगंधा के फायदे पुरुषों में  बांझपन दूर करने के लिए   

पुरुष बांझपन का मुख्य कारण स्पर्म की संख्या , संरचना और उनकी गतिशीलता में कमी होती है | इसमें उपस्थित एमिनो एसिड ,आवश्यक लवण , एंटीऑक्सिडेंट्स , विटामिन A ,C और E स्पर्म की गुणवत्ता को सुधारने में मदद करते हैं | एक अध्ययन में पाया गया कि तीन महीने तक ashwagandha root extract का सेवन करने से स्पर्म की गुणवत्ता में improvement हुई | स्पर्म की संख्या , वीर्य की मात्रा तथा स्पर्म की गतिशीलता में 50% से अधिक की वृद्धि देखी गई | 

अश्वगंधा के फायदे पुरुषों को बेहतर सेक्स ड्राइव के लिए 

प्राचीन समय से ही काम उत्तेजना को बढ़ाने के लिए इसका प्रयोग किया जाता रहा है | कामसूत्र में भी इसका उल्लेख है | जब पुरुष अश्वगंधा लेना शुरू करते हैं तो उनके शरीर में nitric oxide की वृद्धि होती है | परिणामस्वरूप bloodvessels द्वारा ब्लड का प्रवाह reproductive organ तक सुचारु रूप से होता है | इससे सेक्स ड्राइव तथा संतुष्टि दोनों में वृद्धि होती है | अध्ययन से यह भी पता चला है कि इससे erectile डिस्फ़ंक्शन का दोष भी दूर होता है |  

अश्वगंधा के फायदे टेस्टोस्टेरोन को बढ़ाने के लिए 

पुरुषों में 30 वर्ष की आयु के बाद टेस्टोस्टेरोन का स्तर स्वाभाविक रूप से कम होने लगता है | टेस्टोस्टेरोन की कमी से पुरुषों में बाल गिरना , मसल्स की कमी , डिप्रेशन , बोन मास की कमी , ब्रैस्ट का बढ़ जाना ,  यादाश्त तथा फोकस का ख़राब होना , स्पर्म का कम होना जैसे लक्षण दिखने लगते हैं | एक अध्ययन के अनुसार जब तीन महीने तक 300 mg ashwagandha root extract दिन में दो बार दिया गया तो उनके टेस्टस्टेरॉन हारमोन में वृद्धि देखी गयी |  

अश्वगंधा के फायदे तनाव को दूर करने के लिए 

अश्वगंधा का सेवन एड्रेनल ग्लैंड को मजबूत बनाता है | एड्रेनल ग्लैंड से कोर्टिसोल हारमोन निकलता है | यह हारमोन  तनाव के लिए उत्तरदायी होता है | एक स्टडी के अनुसार जब 300mg ashwagandha root extract दिन में दो बार 60 दिन तक दिया गया तब 25% तक कार्टिसोल हारमोन में कमी आयी | फलस्वरूप तनाव में भी कमी आ गयी | जब तनाव अधिक होता है तो BP बढ़ जाता है | जिससे धमनियों में रक्त का प्रवाह बाधित होता है | रक्त रिप्रोडक्टिव ऑर्गन तक पहुँच नहीं पता और इससे नपुंसकता (इम्पोटेंसी )बढ़ती है | 

अश्वगंधा के फायदे सेक्स हारमोन बढ़ाने के लिए 

एक अध्ययन में पाया गया कि इसके सेवन से टेस्टोस्टेरोन और लिउटीनीज़िंग हारमोन में काफी वृद्धि होती है | इसके सेवन से follicle stimulating hormone और prolactin के लेवल को कम किया जा सकता है |इन हारमोन के ज्यादा होने का अर्थ है स्पर्म का कम बनाना | ashwagandha प्लाज्मा मेटाबॉलिट्स और सेक्स हारमोन के बीच संतुलन को बढ़ावा देता है | 

अश्वगंधा के फायदे पुरुषों की सहनशक्ति बढ़ाने के लिए 

Cardio respiratory endurance का अर्थ है किसी भी गतिविधि को करने के लिए बेहतर सहनशक्ति | इसके लिए मांसपेशियों को काफी ऊर्जा की आवश्यकता होती है | इसका सेवन दैनिक जीवन में कार्य करने की क्षमता को बढ़ाता है | यह sexual endurance को भी बढ़ाने में मदद करता है | 

अश्वगंधा के फायदे स्पर्म की क्षति को रोकने के लिए  

इसमें मौजूद एंटीऑक्सिडेंट्स स्पर्म की क्षति होने से रोकते हैं | यह स्पर्म सेल में फैट के लेयर्स के ऑक्सीडेशन को रोकता है जिससे स्पर्म डैमेज नहीं हो पता | इस तरह अश्वगंधा का सेवन पुरुषों को सेक्स सम्बन्धी सभी समस्याओं से मुक्ति दिलाता है | इसे सेक्स टॉनिक भी कहा जा सकता है |

अश्वगंधा के फायदे पुरुषों में मांसपेशी बढ़ाने में

एक अध्ययन में 8 सप्ताह के लिए 300mg ashwagandha root extract supplement दिन में दो बार gym जाने वाले युवकों को दिया गया | 8 सप्ताह बाद बेंच प्रेस और लेग एक्सटेंशन एक्सरसाइज में इम्प्रूवमेंट देखी गयी | एक्सरसाइज के बाद रिकवरी टाइम में भी कमी देखी  गयी | arm  और chest  पर muscle mass भी बढ़ा हुआ पाया गया | इस तरह इसके सेवन से मांसपेशी की संरचना और ताकत में improvement देखने को मिली | 

फैट कम करने में फायदेमंद

इसमें एंटीऑक्सीडेंट होते हैं जो मेटाबोलिज्म को बढ़ा देते हैं | इससे सूजन में कमी आती है तथा शरीर में जमा फैट भी बर्न होता है | यह तनाव और चिंता को कम कर भोजन की तीव्र इच्छा में कमी लाकर वजन कम करता है | वजन नियंत्रित रखने के लिए संतुलित आहार और नियमित व्यायाम भी जरूरी है |  

TSH लेवल कम करने में फायदेमंद

थाइरोइड ग्लैंड से थायरोक्सिन हारमोन T4 निकलता है | शरीर में इस हारमोन की कमी होने से TSH का लेवल बढ़ जाता है | TSH का बढ़ना हाइपोथायरायडिज्म  कहलाता है | हाइपोथयरॉइड के रोगी को जब अश्वगंधा का सेवन कराया जाता है तो उनके TSH लेवल में कमी आती है | ऐसा इसलिए होता है क्योंकि इसके सेवन से थाइरोइड ग्लैंड का फंक्शन सही होने लगता है | जिससे T4 का सेक्रेशन बढ़ जाता है | जीवन शैली में सुधार , परहेज और अश्वगंधा का सेवन पूर्ण रूप से ह्य्पोथयरॉइड को ठीक कर देता है | 

उपयोग का तरीका 

  1. अश्वगंधा के फायदे पुरुषों को लेना है तो इसकी टेबलेट और कैप्सूल बाजार में उपलब्ध है | उस पर बताये गए डोज़ के अनुसार इसका सेवन किया जा सकता है | 
  1. अश्वगंधा की जड़ और पॉवडर बाजार में आसानी से उपलब्ध है | बढ़िया क्वालिटी चाहिए तो ऑनलाइन मंगवाया जा सकता है | 
  1. इसके पॉवडर को गुनगुने दूध और पानी के साथ लिया जाता है | दूध के साथ लेने से यह पुष्टि वर्धक होता है एक चम्मच पॉवडर को एक गिलास पानी या दूध के साथ लेते हैं | 
  1. जड़ के टुकड़े का गर्म पानी के साथ औषधि तैयार किया जाता है | इसके लिए एक लीटर गर्म पानी को उबालते हैं | पानी को गैस से उतार कर 50ग्राम इसका जड़ इसमें डाल देते हैं | ठंढा होने पर इसे कांच के बर्तन में रखकर फ्रीज में रख देते हैं | अब प्रतिदिन 50 ml इसका पानी पीते हैं | यह औषधि थायरॉइड की दवाइयों से भी ज्यादा असरदार होती है | 

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गिलोय के फायदे ,सेवन का तरीका

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गिलोय के फायदे ,सेवन का तरीका / Benefits of Giloy in Hindi https://healthysansaar.in/%e0%a4%97%e0%a4%bf%e0%a4%b2%e0%a5%8b%e0%a4%af-%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%ab%e0%a4%be%e0%a4%af%e0%a4%a6%e0%a5%87-giloy-ke-fayde-in-hindi/?utm_source=rss&utm_medium=rss&utm_campaign=%25e0%25a4%2597%25e0%25a4%25bf%25e0%25a4%25b2%25e0%25a5%258b%25e0%25a4%25af-%25e0%25a4%2595%25e0%25a5%2587-%25e0%25a4%25ab%25e0%25a4%25be%25e0%25a4%25af%25e0%25a4%25a6%25e0%25a5%2587-giloy-ke-fayde-in-hindi https://healthysansaar.in/%e0%a4%97%e0%a4%bf%e0%a4%b2%e0%a5%8b%e0%a4%af-%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%ab%e0%a4%be%e0%a4%af%e0%a4%a6%e0%a5%87-giloy-ke-fayde-in-hindi/#respond Tue, 13 Apr 2021 07:33:11 +0000 https://healthysansaar.in/?p=892 गिलोय क्या होता है ? What is Giloy in Hindi ? भारत के विभिन्न  प्रांतों में पाया जाने वाला गिलोय एक आयुर्वेदिक औषधीय बेल है | इसकी पत्तियां ह्रदय के आकर की होती है। यह पान के पत्ते की तरह दिखता है। इसकी बेल बहुत तेज़ी से वृद्धि करती है। Read more…

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गिलोय के फायदे

गिलोय क्या होता है ? What is Giloy in Hindi ?

भारत के विभिन्न  प्रांतों में पाया जाने वाला गिलोय एक आयुर्वेदिक औषधीय बेल है | इसकी पत्तियां ह्रदय के आकर की होती है। यह पान के पत्ते की तरह दिखता है। इसकी बेल बहुत तेज़ी से वृद्धि करती है। वृद्धि के लिए यह दूसरे वृक्षों को अपना आधार बनाती है। यह बेल जिन वृक्षों  पर चढ़ती है उन वृक्षों का गुण इस लता में आ जाता है | यह नीम ,सहजन, आम सभी वृक्षों पर चढ़ जाती है। नीम पर चढ़ी गिलोय को नीम गिलोय के नाम से जाना जाता है ,यह सर्वोत्तम माना जाता है | गिलोय के फायदे लेने हैं तो इसके पत्ते और डंठल का प्रयोग करना ज्यादा अच्छा होता है। इसके तने के टुकड़े को काटकर मिट्टी में लगा दिया जाये तो उसमें से नई बेल निकल आती है। इसे नमी वाली जगह पसंद है | इस लेख में हम गिलोय के फायदे और सेवन का तरीका जानेंगे। 

गिलोय का वैज्ञानिक नाम Tinospora cordifolia है। इसे गुडुची , अमृता ,चक्रांगी ,कुंडलिनी ,गुलबेल इत्यादि नामों से भी जाना जाता है | यह बहुत पुरानी औषधि मानी जाती है। आयुर्वेद के जनक आचार्य चरक के अनुसार गुडुची वात दोष हरने वाली ,त्रिदोष मिटाने  वाली ,खून को साफ़ करने वाली ,रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने वाली ,ज्वर को ख़त्म करने वाली ,खांसी मिटाने वाली औषधि है | गुडुची की डंठल का उपयोग सबसे ज्यादा किया जाता है | 

गिलोय में पाए जाने वाले पोषक तत्व /Nutritional Value of Giloy 

गिलोय के फायदे ताज़ा पत्ते और सूखे पत्ते दोनों प्रकार के पत्तों से प्राप्त किया जा सकता है। दोनों प्रकार के पत्तियों में पोषक तत्वों की मात्रा में अंतर का कारण है, सूखी पत्तियों में नमी की कमी। 100 ग्राम सूखी पत्तियों में पत्तियों की संख्या ज्यादा होती हैं। 

गिलोय की पत्तियां 100 ग्राम 

पोषक तत्वताज़ी पत्तियां ( 100 gm )सुखी पत्तियां (100 gm )
कार्बोहायड्रेट3.34 gm7.53 gm
प्रोटीन 2.30 gm5.23 gm
फैट 0.36 gm1.05 gm
फाइबर 11.32 gm52.3 gm
आयरन 5.87 mg22.55 mg
कैल्शियम 85.2 mg210 mg
विटामिन C 0.56 mg16 mg
बीटा कैरोटीन 303.7 mcg428.5 mcg
एनर्जी 88.64 kcal240 kcal

गिलोय में कॉपर ,फ़ास्फ़रोस ,जिंक और मैंगनीज भी होते हैं  | इसमें गिलोइन नामक ग्लूकोसाइड और टिनोस्पोरिन ,पामेरिन एवं टिनोस्पोरिक एसिड पाया जाता है | इसमें गिलोस्टेरोल तथा बर्बेरिन नामक एल्कलॉइड भी मौजूद हैं | एंटीऑक्सिडेंट्स से भरपूर गुडुची एंटी वायरल ,एंटी बैक्टीरियल ,एंटी इंफ्लेमेटरी ,एंटी कैंसर ,एंटी पाइरेटिक गुणों को दर्शाता है | 

गिलोय के फायदे /Giloy ke fayde / Giloy benefits in Hindi

1. गिलोय  के फायदे इम्युनिटी बढ़ाने में 

रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने में गुडुची /गिलोय का महत्वपूर्ण योगदान है | इसमें मौजूद पोषक तत्व 

  • आयरन की कमी दूर करते हैं। लाल रक्त कणो की संख्या बढ़ाते हैं 
  • प्लेटलेट्स की संख्या बढ़ाते हैं 
  • Wbc  की संख्या मेन्टेन करके रखते हैं

          इसमें मौजूद एंटीऑक्सीडेंट के कारण –

  •  फ्री रेडिकल्स से शरीर का बचाव होता है 
  • किडनी से टॉक्सिन्स बाहर निकलते हैं 
  • लिवर की भी टॉक्सिसिटी कम हो जाती है 

इसमें मौजूद एंटी वायरल और एंटी बैक्टीरियल गुणों के कारण संक्रमण से शरीर का बचाव होता है | यह शरीर की इम्युनिटी को बढ़ाकर बैक्टीरियल और वायरल दोनों इन्फेक्शन को ख़त्म करते हैं  |   

2. गिलोय के फायदे डायबिटीज में 

जिन व्यक्तियों को टाइप – 2 डायबिटीज की समस्या हो ,उन्हें इसका सेवन करना चाहिए | इसमें हाइपो ग्लाइसेमिक एजेंट मौजूद है ,जो रक्त में शर्करा की मात्रा को नियंत्रित करने में मदद करते हैं | यह इन्सुलिन के श्राव को बढ़ाकर इन्सुलिन रेसिस्टेन्स को कम करता है। जब शरीर की कोशिकाएं ग्लूकोज को अब्सॉर्ब नहीं करती तो रक्त में ग्लूकोज का लेवल बढ़ जाता है | ये समस्या उनमें आती हैं जिनमें इन्सुलिन रेसिस्टेन्स हाई होता है। पैंक्रियास /अग्न्याशय  उचित मात्रा में इन्सुलिन का श्राव नहीं कर पाता तो ऐसी स्थिति उत्पन्न हो जाती है। इसमें गुडुची का सेवन फायदेमंद देखा गया है | 

3. गिलोय के फायदे बुखार में 

गुडुची में एंटी पाइरेटिक गुण होते हैं | यह हर तरह के बुखार को ठीक करने की क्षमता रखता है | क्रोनिक फीवर को भी इसके सेवन से ठीक किया जा सकता है | यह रक्त में प्लेटलेट्स की संख्या बढ़ाकर इम्युनिटी बढ़ाता है | एंटी वायरल और एंटी बैक्टीरियल होने के कारण यह संक्रमण को ख़त्म करता है ,जिससे इसका एंटी पायरेटिक गुण प्रभावी रूप से बुखार को समाप्त करने में सक्षम हो पाता है | 

4. पाचन को बेहतर बनाने में फायदेमंद 

गिलोय का जूस और इसका काढ़ा पेट की बीमारियों को दूर रखता है | गिलोय के फायदे  अपच ,कब्ज़ और एसिडिटी की परेशानी को दूर करने में भी है | इसके लिए इसके चूर्ण को गरम पानी के साथ लिया जाता है | यह स्ट्रेस को कम करता है ,इससे भी पाचन शक्ति मजबूत होती है |

5. अस्थमा में भी फायदेमंद 

गुडुची में एंटी इंफ्लेमेटरी गुण होते हैं | इस तरह यह खांसी और अस्थमा दोनों में लाभदायक सिद्ध होता है | श्वसन सम्बन्धी समस्या में गिलोय के फायदे तब ज्यादा होंगे जब गिलोय चूर्ण में मुलैठी चूर्ण और शहद मिलाकर लें ,इससे आराम मिलता है | यह फेफड़े को ताकत देता है तथा स्वस्थ रखता है | गुडुची कफ़ नाशक माना जाता है | 

6. गिलोय के फायदे लिवर क्लींज़िंग में  

गुडुची में मौजूद एंटी ऑक्सीडेंट्स और पोषक तत्व के कारण यह लिवर के लिए एक अच्छा क्लीन्ज़र का कार्य करता है | इसके लिए इसका काढ़ा धनिया और काली मिर्च के साथ बनाया जाता है | 

7. गिलोय के फायदे वायरल और बैक्टीरियल संक्रमण में

गिलोय में एंटीवायरल और एंटी बैक्टीरियल गुण होते हैं | यह संक्रमण के शुरुआती लक्षण को ख़त्म करता है और संक्रमण को फैलने से रोकता है | यह मितली की समस्या ,गले में कफ़ का महसूस होना ,खांसी इत्यादि को शुरुआत में ही ठीक कर देता है | 

8. एनीमिया में फायदेमंद 

गुडुची में आयरन की मात्रा अच्छी पायी जाती है | आयरन की मात्रा इसके चूर्ण में ज्यादा होती है | इसमें मौजूद कॉपर और विटामिन C के कारण यह हिमोग्लोबिन को बढ़ाने में मदद करता है। कॉपर के कारण आयरन शरीर के द्वारा अच्छी तरह अब्सॉर्ब कर लिया जाता है | आयरन की कमी पूरी होने से हीमोग्लोबिन का लेवल सही हो जाता है जिससे एनीमिया रोग ख़त्म हो जाता है। एनीमिया में गिलोय के फायदे प्राप्त करना हो तो एक दिन में दो बार इसके चूर्ण का सेवन करना चाहिए | यह कम्पलीट ब्लड काउंट रिपोर्ट में सकारात्मक परिवर्तन दिखाता है। डेंगू बुखार में प्लेटलेट्स की वृद्धि के लिए गिलोय के फायदे अद्भुत हैं। 

9. गिलोय के फायदे वात रोगों में 

आचार्य चरक ने गिलोय को वात ,पित्त और कफ़ तीनों दोषों में फायदेमंद बताया है। वात दोष में 80 प्रकार के रोग शामिल हैं। जिनमें से कुछ हैं – गठिया ,साइटिका ,मुंह का सूखना ,आँखों से संबंधित समस्याएं ,हाथ पैरो में दर्द रहना ,गैस बनना और ऊपर की तरफ आना इत्यादि | इन सब में इसके चूर्ण को गाय के घी के साथ लाभदायक बताया जाता है | गुडुची में एंटी इंफ्लेमेटरी गुण होते हैं ,इस कारण यह शरीर में सूजन को कम करता है।

10. यौन स्वास्थ्य के लिए लाभदायक 

इसमें मौजूद प्लांट कंपाउंड्स और अन्य पोषक तत्व के कारण गिलोय के फायदे  पुरुषों और महिलाओं दोनों के यौन स्वास्थ्य को बेहतर बनाने में है | यह खून की कमी को दूर कर ,खून का संचार हर अंगों तक करने में मदद करता है। इसके सेवन से स्टैमिना बढ़ती है तथा इसमें मौजूद प्लांट कंपाउंड्स काम उत्तेजना को बढ़ाते हैं | 

11. गिलोय के फायदे मस्तिष्क के लिए 

गिलोय को अडाप्टोजनिक जड़ी बूटी के रूप में इस्तेमाल किया जाता है। यह स्ट्रेस रिलीफ का कार्य करता है। यह याददाश्त तेज़ करने के साथ साथ कॉन्सेंट्रेशन और फोकस को बढ़ाने में भी सहायता करता है | इसके लिए giloy के जूस को टॉनिक की तरह प्रयोग किया जाता है | 

12. गुडुची के फायदे हाथीपांव /फ़ाइलेरिया में

फ़ाइलेरिया में हाथ और पांव में सूजन हो जाता है। फ़ाइलेरिया के कीड़े परजीवी होते हैं | यह मच्छरों के द्वारा एक जगह से दूसरे जगह पहुँच जाते हैं। इस समस्या में giloy का सेवन फायदेमंद होता है। इसके लिए आचार्य द्वारा बताये गए नियमानुसार गुडुची का सेवन करना चाहिए। 

13. त्वचा के लिए फायदेमंद 

गिलोय में एंटी एजिंग गुण पाए जाते हैं। इसके सेवन से झुर्रियां और फाइन लाइन्स में कमी आती है। यह शरीर से विषाक्त पदार्थ को बाहर निकालता है ,जिससे कील मुहांसे ठीक होते हैं | इसमें मौजूद पोषक तत्व स्किन की इलास्टिसिटी को मेन्टेन करके रखते हैं | गुडुची वात ,पित्त और कफ़ तीनो दोषों को दूर करता है ,इसलिए भी यह त्वचा के लिए लाभदायक साबित होता  है | 

गिलोय का सेवन कैसे करना चाहिए /How to use Giloy 

गिलोय को वात ,पित्त और कफ़ तीनो दोषों को दूर करने में सक्षम बताया गया है | यही कारण है कि गिलोय के फायदे हर प्रकार के रोगों में  बताया जाता है। इसके गुण जितने हैं ,उतना ज्ञान अभी तक लोगों को नहीं हो पाया है। इसने अपना नाम अमृता को सार्थक किया है | हर प्रकार के वायरल फीवर और वायरल इन्फेक्शन को यह ठीक करता है | इसके लिए तीनो दोषों में giloy को लेने का तरीका अलग- अलग है | 

गिलोय के फायदे वात दोष में कैसे लें 

वात दोष के कारण होने वाली समस्याएं  जैसे गठिया ,साइटिका ,शरीर में दर्द रहना ,अत्यधिक रूखापन,मुंह का सूखना ,आँखों में दर्द रहना ,पेट में ऐठन, स्वाद और गंध का पता न चलना इत्यादि | इसमें गुडुची के चूर्ण का सेवन गाय के घी या अरण्ड के तेल के साथ किया जाता है   |

पित्त दोष में गिलोय का सेवन कैसे करें 

शरीर में गर्मी का बढ़ जाना ,अधिक पसीना आना ,नकसीर की समस्या ,शरीर का रंग पीला पड़ना ,फोड़े  फुंसी होना ,हाथ पाव में जलन , आँखों का लाल होना ये सब पित्त दोष के कारण होने वाली समस्याएं हैं  | पित्त दोष में इसका जूस पीना चाहिए और इसके चूर्ण का सेवन शक्कर अर्थात खाण्ड के साथ करना चाहिए | 

कफ़ दोष में गिलोय के फायदे कैसे लें 

शरीर में सूजन ,खांसी ,जुकाम ,बलगम का ज्यादा बनना ,साँस की तकलीफ़ इत्यादि कफ़ दोष के कारण उत्पन्न होने वाली समस्याएं हैं | इसके लिए giloy को शहद के साथ लिया जाना चाहिए | 

गुडुची /गिलोय के सेवन की मात्रा

यदि गुडुची /giloy के चूर्ण का सेवन कर रहे हैं तो एक दिन में एक ग्राम से कम ही इसकी मात्रा रखनी चाहिए | 

यदि इसका जूस ले रहे हैं तो 10 -15 ml एक दिन में लेना चाहिए | यह एक औषधि है इसलिए इसे बिना कारण नहीं लिया जाना चाहिए | एक महीने तक लगातार सेवन कर  लिया हो तो आवश्यक है कि इसे लेना बंद करें। गिलोय की तासीर ठंडी होती है | इसके बावजूद गर्भवती महिलाओं और दूध पिलाने वाली माताओं को इसके सेवन से दूर रहना चाहिए। कभी आवश्यकता हुई इसे लेने कि तो आयुर्वेद आचार्य से सलाह कर के लें। 

उम्मीद है कि आप लोगों ने  भी इसका फायदा उठाया होगा | आप अपना अनुभव हमें बताएं ताकि ज्यादा से ज्यादा लोग इसे जान सकें और वो भी इसका लाभ उठाए | आपके द्वारा बताये गए अनुभव दूसरों तक इस लेख के द्वारा पहुँचेगा | 

कैसा रहा आपका अनुभव ?

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तुलसी के फायदे और नुकसान /Tulsi Benefits ,Side effects https://healthysansaar.in/%e0%a4%a4%e0%a5%81%e0%a4%b2%e0%a4%b8%e0%a5%80-%e0%a4%ab%e0%a4%be%e0%a4%af%e0%a4%a6%e0%a5%87-%e0%a4%a8%e0%a5%81%e0%a4%95%e0%a4%b8%e0%a4%be%e0%a4%a8-tulsi-ke-fayde-nuksan-in-hindi/?utm_source=rss&utm_medium=rss&utm_campaign=%25e0%25a4%25a4%25e0%25a5%2581%25e0%25a4%25b2%25e0%25a4%25b8%25e0%25a5%2580-%25e0%25a4%25ab%25e0%25a4%25be%25e0%25a4%25af%25e0%25a4%25a6%25e0%25a5%2587-%25e0%25a4%25a8%25e0%25a5%2581%25e0%25a4%2595%25e0%25a4%25b8%25e0%25a4%25be%25e0%25a4%25a8-tulsi-ke-fayde-nuksan-in-hindi https://healthysansaar.in/%e0%a4%a4%e0%a5%81%e0%a4%b2%e0%a4%b8%e0%a5%80-%e0%a4%ab%e0%a4%be%e0%a4%af%e0%a4%a6%e0%a5%87-%e0%a4%a8%e0%a5%81%e0%a4%95%e0%a4%b8%e0%a4%be%e0%a4%a8-tulsi-ke-fayde-nuksan-in-hindi/#respond Mon, 09 Nov 2020 07:59:10 +0000 https://healthysansaar.in/?p=601 भारत में तुलसी के पौधे को देवी का दर्जा दिया जाता है। अधिकांश घरों में पवित्र तुलसी की पूजा की जाती है। इसका जितना महत्व धार्मिक कार्यों में है उतना ही यह औषधीय दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है | इसका प्रयोग हज़ारों वर्षों से आयुर्वेद में किया जा रहा है।  Read more…

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भारत में तुलसी के पौधे को देवी का दर्जा दिया जाता है। अधिकांश घरों में पवित्र तुलसी की पूजा की जाती है। इसका जितना महत्व धार्मिक कार्यों में है उतना ही यह औषधीय दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है | इसका प्रयोग हज़ारों वर्षों से आयुर्वेद में किया जा रहा है। 

तुलसी के फायदे

तुलसी को इंग्लिश में holy basil कहते हैं। इसका वानस्पतिक नाम Ocimum sanctum है। तुलसी का पौधा सामान्यतः 50-60 cm ऊँचा होता है। तुलसी की कई प्रजातियाँ हैं जिनमें से हरे रंग की बड़ी पत्तियों वाली राम तुलसी और छोटी पत्तियों वाली बैंगनी या काले रंग की श्यामा तुलसी/कृष्णा तुलसी प्रमुख है। इनके फूल छोटे – छोटे सफ़ेद और बैंगनी रंग के होते हैं। 

तुलसी की तासीर गर्म होती है। यह कफ और वात दोष को शांत करती है पर पित्त दोष को यह थोड़ा बढ़ा देती है। इसमें विटामिन A ,विटामिन C और विटामिन K होते हैं साथ ही इसमें कैल्शियम ,मैग्नीशियम ,फास्फोरस ,आयरन और पोटेशियम भी होते हैं | इसमें प्रोटीन और फाइबर भी होता है | इसके अतिरिक्त इसमें निम्न प्लांट कंपाउंड्स भी होते हैं –

  • Eugenol – यह लौंग में भी होता है 
  • Ursolic and rosmarinic acid 
  • Lutein – यह आँख के लिए महत्वपूर्ण है। 
  • Ocimumoside A and B -यह एंटी स्ट्रेस एजेंट है तथा यह सेरोटोनिन और डोपामाइन को बैलेंस करता है 
  • Apigenin – यह फ्लेवोनॉयड है 

तुलसी के फायदे / Benefits of Tulsi in Hindi 

1. रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए फायदेमंद 

तुलसी के पत्ते का प्रयोग immunity booster की तरह किया जाता है क्योंकि इसमें विटामिन C और जिंक मौजूद हैं। इसमें एंटी वायरल ,एंटी बैक्टीरियल तथा एंटी फंगल गुण है जिस कारण विभिन्न प्रकार के संक्रमण से यह हमें बचाता है। यह TLC /T lymphocytes cell को बढ़ाता है जो प्राकृतिक तरीके से इन्फेक्टेड होस्ट सेल्स को नष्ट करते  हैं  | 

2. तनाव कम करने में फायदेमंद 

तुलसी को एडाप्टोजेन प्लांट कहा जाता है क्योंकि यह तनाव कम करता है। इसे स्ट्रेस रिलीफ औषधि की तरह प्रयोग किया जाता है। इसमें ocimumosides A and B प्लांट कम्पाउंड्स हैं जो तनाव को कम करते हैं और सेरोटोनिन तथा डोपामाइन को बैलेंस करते हैं। दोनों मूड को बढ़िया बनाये रखने के लिए उपयोगी है।  इससे एंग्जायटी में भी आराम मिलता है | 

3. ह्रदय स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद  

तुलसी में कार्डिओ प्रोटेक्टिव  गुण पाए जाते हैं। यह रक्त में लिपिड को कम करता है तथा ब्लड प्रेशर को भी कम करता है | यह स्ट्रेस रिलीफ करने में भी मदद करता है जिससे ह्रदय रोग का खतरा कम हो जाता है | 

4. डायबिटीज में भी फायदेमंद  

तुलसी में हाइपोग्लिसेमिक गुण होते हैं जिससे यह रक्त में शुगर का लेवल कम करता है। डायबिटिक पेशेंट भी इसका प्रयोग अन्य रोगों से बचाव और इम्यून बूस्ट करने के लिए कर सकते हैं। 

5. किडनी स्टोन और गठिया में उपयोगी 

तुलसी के पत्ते को शहद के साथ लेने से किडनी स्टोन और गठिया दोनों में फायदा होता  है। यह मूत्रवर्धक गुण को दर्शाता है। इसके सेवन से यूरिक एसिड के लेवल में कमी आती है। जो किडनी स्टोन के कारण में से एक कारण हो सकता है। यूरिक एसिड की कमी होने से गठिया में आराम मिलता है। इसमें एंटी इंफ्लेमेटरी गुण होते हैं। इससे सूजन में कमी आती है। 

6. पेट सम्बंधित परेशानी में फायदेमंद 

यदि भूख नहीं लग रही हो और अपच की समस्या हो तो तुलसी चाय पीने से आराम मिलता है। यह चाय ब्लोटिंग और दस्त में भी राहत दिलाती है। पेट में मरोड़ आ रही हो तो उसमें भी इस चाय को पीने से आराम मिलता है। 

7. श्वसन सम्बन्धी समस्या में उपयोगी 

यदि  साँस लेने में दिक्कत हो रही हो , अस्थमा की समस्या हो ,सर्दी जुकाम हो या फ्लू जैसी किसी वायरस का संक्रमण हो तो तुलसी ,अदरक ,लौंग और काली मिर्च की चाय शहद के साथ लेने से ठीक होता है। इसमें camphene ,cineole और eugenol एंटीऑक्सीडेंट्स होते हैं जिस कारण यह गले की खराश और श्वसन सम्बन्धी समस्या को ठीक करता है। 

8. तुलसी कैंसर से बचाव के लिए 

इसमें phytochemicals होते हैं जो प्राकृतिक रूप से त्वचा के कैंसर ,लिवर कैंसर ,मौखिक कैंसर और फेफड़ों के कैंसर को रोकने में मदद करता है। इसमें मौजूद एंटीऑक्सीडेंट्स कैंसर सेल के ग्रोथ को रोकता है। 

9. सिरदर्द में आराम 

तुलसी की पत्तियों को पानी में उबालकर चाय की तरह पिएं। यह तनाव को कम कर मूड को ठीक करता है। इससे मांसपेशियां भी रिलैक्स होती हैं और सिरदर्द में आराम मिलने लगता है। 

10. मौखिक स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद 

तुलसी मौखिक स्वास्थ्य के लिए अच्छा होता है। यह पायरिया और मुंह की दुर्गन्ध को ख़त्म करता है। यह मसूड़ों को मजबूत बनाता है। इसके पाउडर को सरसों तेल में मिलाकर दाँत और मसूड़ों की मालिश करने से मसूड़ें स्वस्थ होती हैं तथा पायरिया भी ठीक होता है | इसमें मरकरी की मौजूदगी होती है जो कीटाणु को ख़त्म करने में सहायता करती है। लेकिन मरकरी दांत के संपर्क में लम्बे समय तक रह जाये तो यह दांत में सड़न कर सकता है। इसलिए तुलसी पत्ते चबाने के बाद अच्छे से कुल्ला कर लें ताकि पारा का अंश न रह जाये। 

11. आँखों के लिए फायदेमंद 

तुलसी की पत्तियों में विटामिन A और lutein एंटीऑक्सीडेंट होते हैं। दोनों ही आँखों को स्वस्थ रखने में अहम भूमिका निभाते हैं। आँखों में सूजन हो या संक्रमण हो गया हो तो इसकी पत्तियों को उबालकर ,उस पानी से आँखों को धोने से आराम मिलता है। गुलाब जल में तुलसी पत्ते के रस को मिलाकर प्रभावित आँख में दो-दो बूँद डालने से भी आराम मिलता है। 

12. मलेरिया और टाइफाइड में फायदेमंद 

तुलसी के पत्ते को उबालकर उसका चाय सुबह शाम पीने से मलेरिया और टाइफाइड दोनों में लाभ मिलता है।इसमें बुखार को भी ठीक करने का गुण होता है। टाइफाइड की स्थिति में तुलसी पत्ता और काली मिर्च का साथ में काढ़ा बनाये और इसका सुबह शाम सेवन करें।  यह बहुत फायदेमंद होता है। 

13. अनियमित पीरियड्स में फायदेमंद  

यदि पीरियड समय पर नहीं आ रहा हो तो तुलसी बीज के सेवन से फायदा होता है। इसके बीज के सेवन से कमजोरी भी ठीक होती है और यह वात दोष को भी दूर करता है। वात दोष के बिगड़ने से पीरियड्स की साइकिल ख़राब हो जाती है। 

14. तुलसी त्वचा के संक्रमण में लाभदायक 

त्वचा सम्बन्धी हर प्रकार की समस्या में इसके पत्ते रामबाण की तरह कार्य करते हैं। इसके लिए इसके रस को प्रभावित जगह पर लगाया जाता है | इससे दाद , खुजली और सोरायसिस में भी आराम मिलता है। इसके चाय के सेवन से रक्त शुद्ध होता है तथा त्वचा सम्बन्धी परेशानी दूर होती है।बेसन में तुलसी पाउडर को मिलाकर पेस्ट बनाया जाये और इस पेस्ट को इन्फेक्शन वाली जगह पर लगायी जाये तो संक्रमण सही होता है। इससे मुंहासे भी ठीक होते हैं।   इन पत्तियों में एंटी इंफ्लेमेटरी ,एंटी बैक्टीरियल और एंटी एजिंग गुण होते हैं जिस कारण यह त्वचा को स्वस्थ और कोमल बना कर रखता है। 

तुलसी पत्ते के अन्य फायदे 

तुलसी के उपयोग
  • रोज़ाना सुबह 4-5 पत्तियां खायी जाये तो दिमाग तेज़ होता है तथा दिमाग की कार्यक्षमता भी बढ़ती है। 
  • साइनोसाइटिस / साइनस के रोगी इसकी पत्तियों या मंजरी को मसलकर सूंघे तो आराम मिलता है।
  • कान में दर्द या सूजन हो तो तुलसी के रस को गुनगुना करके डालने से  आराम मिलता है। इन पत्तियों की चाय पीने से भी आराम मिलता है। 
  • सिर में जुएं हो तो पत्तियों को नारियल तेल में धीमी आंच पर 10 मिनट के लिए पकाकर ,उस तेल से स्कैल्प की मालिश करें। इससे जुएं ख़त्म हो जायेंगे। 
  • पीलिया रोग में तुलसी पत्ते की चाय पीने से आराम मिलता है। 
  • इसका रस कुष्ठ रोग में भी लाभकारी है। इसके लिए सुबह – सुबह एक चम्मच तुलसी के पत्तों के रस का सेवन करना चाहिए।
  • इसके पत्ते की चाय पीने से लिवर स्वच्छ होता है। यह चाय लिवर को डिटॉक्सिफाई करता है।  
  • इसके बीज को छाछ के साथ लेने से बवासीर की समस्या ख़त्म होती है। 
  • चोट लग जाने पर तुलसी पत्ते और फिटकरी लगाने से घाव जल्दी भर जाता है तथा इन्फेक्शन भी नहीं होता। 
  • प्रतिदिन तुलसी पौधे के पास बैठने से तनाव कम होता है तथा अस्थमा और सांस की समस्या में राहत मिलती है। 

तुलसी पत्ते का सेवन कैसे करें

  • तुलसी की 4 – 5 पत्तियां सुबह खाली पेट चबा कर खाया जा सकता है। उसके बाद अच्छे से दांत साफ करें। दांत में पत्तियों का अंश नहीं रहना चाहिए क्योंकि इसमें मरकरी होता है और यह दांत को नुकसान पहुंचाता है। 
  • इन पत्तियों के रस को पानी में डालकर पिया जा सकता है। 
  • पत्तियों को पानी में उबालकर चाय की तरह भी पी सकते हैं। 
  • सलाद में भी इन पत्तियों को बारीक़ काटकर खाया जा सकता है। 
  • धनिया पत्ती की तरह ,तुलसी की पत्तियों को भी दाल सब्जी में डाला जा सकता है। 
  • इनकी पत्तियों को सूखाकर चाय या मसाले की तरह भी प्रयोग में लाया जा सकता है। 

तुलसी पत्ते का नुकसान 

  • इसकी तासीर गर्म होती है। यह पित्त दोष को बढ़ाता है। इसके ज्यादा प्रयोग से शरीर में गर्मी हो सकती है। सीने में जलन ,एसिडिटी और पेट में जलन भी संभव है। 
  • यह एंटी फर्टिलिटी प्रभाव को दर्शाता है। पुरुषों में स्पर्म काउंट कम होने की सम्भावना रहती है तथा जिन महिलाओं को गर्भधारण करना है उन्हें भी इसका सेवन नहीं करना चाहिए। 
  • गर्भवती महिलाओं और स्तनपान कराने वाली महिलाओं को भी इसका सेवन नहीं करना चाहिए | इस बात का जिक्र कहीं नहीं है कि इन अवस्था में तुलसी का सेवन सुरक्षित है।  इसलिए इससे परहेज करना ही सही होगा। 
  • यह रक्त को पतला करती है। इसलिए इसे ब्लड थिनर जैसी दवाओं के साथ नहीं लिया जाना चाहिए।
  • जिनका शुगर लेवल कम रहता हो ,वे भी इसका सेवन नहीं करें। 

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गिलोय के फायदे / Health Benefits of Giloy https://healthysansaar.in/%e0%a4%97%e0%a4%bf%e0%a4%b2%e0%a5%8b%e0%a4%af-%e0%a4%ab%e0%a4%be%e0%a4%af%e0%a4%a6%e0%a5%87-giloy-ke-fayde-health-benefits-of-giloy/?utm_source=rss&utm_medium=rss&utm_campaign=%25e0%25a4%2597%25e0%25a4%25bf%25e0%25a4%25b2%25e0%25a5%258b%25e0%25a4%25af-%25e0%25a4%25ab%25e0%25a4%25be%25e0%25a4%25af%25e0%25a4%25a6%25e0%25a5%2587-giloy-ke-fayde-health-benefits-of-giloy https://healthysansaar.in/%e0%a4%97%e0%a4%bf%e0%a4%b2%e0%a5%8b%e0%a4%af-%e0%a4%ab%e0%a4%be%e0%a4%af%e0%a4%a6%e0%a5%87-giloy-ke-fayde-health-benefits-of-giloy/#comments Tue, 06 Oct 2020 23:56:18 +0000 https://healthysansaar.in/?p=508 भारत के विभिन्न  प्रांतों में पाया जाने वाला गिलोय एक आयुर्वेदिक औषधीय बेल है | इसकी पत्तियां ह्रदय के आकर की होती है। यह पान के पत्ते की तरह दिखता है। इसकी बेल बहुत तेज़ी से वृद्धि करती है। वृद्धि के लिए यह दूसरे वृक्षों को अपना आधार बनाती है। Read more…

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गिलोय के फायदे

भारत के विभिन्न  प्रांतों में पाया जाने वाला गिलोय एक आयुर्वेदिक औषधीय बेल है | इसकी पत्तियां ह्रदय के आकर की होती है। यह पान के पत्ते की तरह दिखता है। इसकी बेल बहुत तेज़ी से वृद्धि करती है। वृद्धि के लिए यह दूसरे वृक्षों को अपना आधार बनाती है। यह बेल जिन वृक्षों  पर चढ़ती है उन वृक्षों का गुण इस लता में आ जाता है | यह नीम ,सहजन, आम सभी वृक्षों पर चढ़ जाती है। नीम पर चढ़ी गिलोय को नीम गिलोय के नाम से जाना जाता है ,यह गिलोय सर्वोत्तम मन जाता है | इसके तने के टुकड़े को काटकर मिट्टी में लगा दिया जाये तो उसमें से नई बेल निकल आती है। इसे नमी वाली जगह पसंद है |

गिलोय का वैज्ञानिक नाम Tinospora cordifolia है। इसे गुडुची , अमृता ,चक्रांगी ,कुंडलिनी ,गुलबेल इत्यादि नामों से भी जाना जाता है | यह बहुत पुरानी औषधि मानी जाती है। आयुर्वेद के जनक आचार्य चरक के अनुसार गिलोय वात दोष हरने वाली ,त्रिदोष मिटाने  वाली ,खून को साफ़ करने वाली ,रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने वाली ,ज्वर को ख़त्म करने वाली ,खांसी मिटाने वाली औषधि है | गिलोय की डंठल का उपयोग सबसे ज्यादा किया जाता है | 

गिलोय के पोषक तत्व /Nutritional Value of Giloy 

गिलोय की पत्तियां 100 ग्राम 

पोषक तत्व / ताज़ी पत्तियां / सुखी पत्तियां

कार्बोहायड्रेट / 3 .34 g / 7. 53 g 

प्रोटीन / 2. 30 g / 5. 23 g 

फैट / . 36 g / 1. 05 g 

फाइबर / 11. 32 g / 52. 3 g

आयरन / 5. 87 mg / 22. 55 mg 

कैल्शियम / 85. 2 mg / 210 mg 

विटामिन C / 0. 56 mg / 16 mg 

बीटा कैरोटीन / 303. 7 mcg / 428. 5 mcg

एनर्जी / 88. 64 kcal / 240 kcal   

गिलोय में कॉपर ,फ़ास्फ़रोस ,जिंक और मैंगनीज भी होते हैं  | इसमें गिलोइन नामक ग्लूकोसाइड और टिनोस्पोरिन ,पामेरिन एवं टिनोस्पोरिक एसिड पाया जाता है | इसमें गिलोस्टेरोल तथा बर्बेरिन नामक एल्कलॉइड भी मौजूद हैं | एंटीऑक्सिडेंट्स से भरपूर गुडुची एंटी वायरल ,एंटी बैक्टीरियल ,एंटी इंफ्लेमेटरी ,एंटी कैंसर ,एंटी पाइरेटिक गुणों को दर्शाता है | 

गिलोय के फायदे / Giloy benefits in hindi 

  1. गिलोय  के फायदे इम्यून बढ़ाने में 

रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने में गुडुची /गिलोय का महत्वपूर्ण योगदान है | इसमें मौजूद पोषक तत्व 

  • आयरन की कमी दूर करते हैं। लाल रक्त कणो की संख्या बढ़ाते हैं 
  • प्लेटलेट्स की संख्या बढ़ाते हैं 
  • Wbc  की संख्या मेन्टेन करके रखते हैं

          इसमें मौजूद एंटी ऑक्सीडेंट के कारण फ्री रेडिकल्स से शरीर का बचाव होता है 

  • किडनी से टॉक्सिन्स बाहर निकलते हैं 
  • लिवर की भी टॉक्सिसिटी कम हो जाती है 

इसमें मौजूद एंटी वायरल और एंटी बैक्टीरियल गुणों के कारण संक्रमण से शरीर का बचाव होता है | यह शरीर की इम्युनिटी को बढ़ाकर बैक्टीरियल और वायरल दोनों इन्फेक्शन को ख़त्म करते हैं  |   

  1. गिलोय के फायदे डायबिटीज में 

जिन व्यक्तियों को टाइप – 2 डायबिटीज की समस्या हो ,उन्हें गिलोय का सेवन करना चाहिए | इसमें हाइपो ग्लिसेमिक एजेंट मौजूद है ,जो रक्त में शर्करा की मात्रा को नियंत्रित करने में मदद करते हैं | यह इन्सुलिन के श्राव को बढ़ाकर इन्सुलिन रेसिस्टेन्स को कम करता है। जब शरीर की कोशिकाएं ग्लूकोज को अब्सॉर्ब नहीं करती तो रक्त में ग्लूकोज का लेवल बढ़ जाता है | ये समस्या उनमें आती हैं जिनमें इन्सुलिन रेसिस्टेन्स हाई होता है। पैंक्रियास /अग्न्याशय  उचित मात्रा में इन्सुलिन का श्राव नहीं कर पाता तो ऐसी स्थिति उत्पन्न हो जाती है। इसमें गिलोय का सेवन फायदेमंद देखा गया है | 

  1. गिलोय के फायदे बुखार में 

गुडुची में एंटी पाइरेटिक गुण होते हैं | यह हर तरह के बुखार को ठीक करने की क्षमता रखता है | क्रोनिक फीवर को भी इसके सेवन से ठीक किया जा सकता है | यह रक्त में प्लेटलेट्स की संख्या बढ़ाकर इम्युनिटी बढ़ाता है | एंटी वायरल और एंटी बैक्टीरियल होने के कारण यह संक्रमण को ख़त्म करता है ,जिससे इसका एंटी पायरेटिक गुण प्रभावी रूप से बुखार को समाप्त करने में सक्षम हो पाता है | 

  1. पाचन को बेहतर बनाने में फायदेमंद 

गिलोय का जूस और गिलोय का काढ़ा पेट की बीमारियों को दूर रखता है | यह अपच ,कब्ज़ और एसिडिटी की परेशानी को दूर करता है | इसके लिए गिलोय के चूर्ण को गरम पानी के साथ लिया जाता है | यह स्ट्रेस को कम करता है ,इससे भी पाचन शक्ति मजबूत होती है |

  1. अस्थमा में भी फायदेमंद 

गुडुची में एंटी इंफ्लेमेटरी गुण होते हैं | इस तरह यह खांसी और अस्थमा दोनों में लाभदायक सिद्ध होता है | श्वसन सम्बन्धी समस्या हो तो गिलोय के चूर्ण में मुलैठी चूर्ण और शहद मिलाकर लें ,इससे आराम मिलता है | यह फेफड़े को ताकत देता है तथा स्वस्थ रखता है | गिलोय कफ़ नाशक माना जाता है | 

  1. लिवर के लिए भी फायदेमंद 

गुडुची में मौजूद एंटी ऑक्सीडेंट्स और पोषक तत्व के कारण यह लिवर के लिए एक अच्छा क्लीन्ज़र का कार्य करता है | इसके लिए इसका काढ़ा धनिया और काली मिर्च के साथ बनाया जाता है | 

  1. वायरल और बैक्टीरियल संक्रमण में फायदेमंद 

गिलोय में एंटीवायरल और एंटी बैक्टीरियल गुण होते हैं | यह संक्रमण के शुरुआती लक्षण को ख़त्म करता है और संक्रमण को फैलने से रोकता है | यह मितली की समस्या ,गले में कफ़ का महसूस होना ,खांसी इत्यादि को शुरुआत में ही ठीक कर देता है | 

  1. एनीमिया में फायदेमंद 

गिलोय में आयरन की मात्रा अच्छी पायी जाती है | आयरन की मात्रा गिलोय चूर्ण में ज्यादा होती है | इसमें मौजूद कॉपर और विटामिन C के कारण यह हिमोग्लोबिन को बढ़ाने में मदद करता है। कॉपर के कारण आयरन शरीर के द्वारा अच्छी तरह अब्सॉर्ब कर लिया जाता है | आयरन की कमी पूरी होने से हीमोग्लोबिन का लेवल सही हो जाता है जिससे एनीमिया रोग ख़त्म हो जाता है। इसके लिए गिलोय के चूर्ण का सेवन करना चाहिए |

  1. वात रोगों में फायदेमंद 

आचार्य चरक ने गिलोय को वात ,पित्त और कफ़ तीनों दोषों में फायदेमंद बताया है। वात दोष में 80 प्रकार के रोग शामिल हैं। जिनमें से कुछ हैं – गठिया ,साइटिका ,मुंह का सूखना ,आँखों से संबंधित समस्याएं ,हाथ पैरो में दर्द रहना ,गैस बनना और ऊपर की तरफ आना इत्यादि | इन सब में गिलोय के चूर्ण को गाय के घी के साथ लाभदायक बताया जाता है | गुडुची में एंटी इंफ्लेमेटरी गुण होते हैं ,इस कारण यह शरीर में सूजन को कम करता है।

  1. यौन स्वास्थ्य के लिए लाभदायक 

गिलोय में मौजूद प्लांट कंपाउंड्स और अन्य पोषक तत्व पुरुषों और महिलाओं दोनों के यौन स्वास्थ्य को बेहतर बनाता है | यह खून की कमी को दूर कर ,खून का संचार हर अंगों तक करने में मदद करता है। इसके सेवन से स्टैमिना बढ़ती है तथा इसमें मौजूद प्लांट कंपाउंड्स काम उत्तेजना को बढ़ाते हैं | 

  1. मस्तिष्क के लिए फायदेमंद 

गिलोय को अडाप्टोजनिक जड़ी बूटी के रूप में इस्तेमाल किया जाता है। यह स्ट्रेस रिलीफ का कार्य करता है। यह याददाश्त तेज़ करने के साथ साथ कॉन्सेंट्रेशन और फोकस को बढ़ाने में भी सहायता करता है | इसके लिए giloy के जूस को टॉनिक की तरह प्रयोग किया जाता है | 

  1. हाथीपांव /फ़ाइलेरिया में फायदेमंद 

फ़ाइलेरिया में हाथ और पांव में सूजन हो जाता है। फ़ाइलेरिया के कीड़े परजीवी होते हैं | यह मच्छरों के द्वारा एक जगह से दूसरे जगह पहुँच जाते हैं। इस समस्या में गिलोय का सेवन फायदेमंद होता है। इसके लिए आचार्य द्वारा बताये गए नियमानुसार गुडुची का सेवन करना चाहिए। 

  1. त्वचा के लिए फायदेमंद 

गिलोय में एंटी एजिंग गुण पाए जाते हैं। इसके सेवन से झुर्रियां और फाइन लाइन्स में कमी आती है। यह शरीर से विषाक्त पदार्थ को बाहर निकालता है ,जिससे कील मुहांसे ठीक होते हैं | इसमें मौजूद पोषक तत्व स्किन की इलास्टिसिटी को मेन्टेन करके रखते हैं | गिलोय वात ,पित्त और कफ़ तीनो दोषों को दूर करता है ,इसलिए भी यह त्वचा के लिए लाभदायक साबित होता  है | 

गिलोय का सेवन कैसे करना चाहिए /How to use Giloy 

गिलोय को वात ,पित्त और कफ़ तीनो दोषों को दूर करने में सक्षम बताया गया है | यही कारण है कि यह हर प्रकार के रोग में फायदेमंद बताया जाता है। इसके गुण जितने हैं ,उतना ज्ञान अभी तक लोगों को नहीं हो पाया है। इसने अपना नाम अमृता को सार्थक किया है | हर प्रकार के वायरल फीवर और वायरल इन्फेक्शन को यह ठीक करता है | इसके लिए तीनो दोषों में giloy को लेने का तरीका अलग- अलग है | 

वात दोष 

वात दोष के कारण होने वाली समस्याएं  जैसे गठिया ,साइटिका ,शरीर में दर्द रहना ,अत्यधिक रूखापन,मुंह का सूखना ,आँखों में दर्द रहना ,पेट में ऐठन, स्वाद और गंध का पता न चलना इत्यादि | इसमें गुडुची के चूर्ण का सेवन गाय के घी या अरण्ड के तेल के साथ किया जाता है   |

पित्त दोष 

शरीर में गर्मी का बढ़ जाना ,अधिक पसीना आना ,नकसीर की समस्या ,शरीर का रंग पीला पड़ना ,फोड़े  फुंसी होना ,हाथ पाव में जलन , आँखों का लाल होना ये सब पित्त दोष के कारण होने वाली समस्याएं हैं  | पित्त दोष में गिलोय का जूस पीना चाहिए और इसके चूर्ण का सेवन शक्कर अर्थात खाण्ड के साथ करना चाहिए | 

कफ़ दोष 

शरीर में सूजन ,खांसी ,जुकाम ,बलगम का ज्यादा बनना ,साँस की तकलीफ़ इत्यादि कफ़ दोष के कारण उत्पन्न होने वाली समस्याएं हैं | इसके लिए giloy को शहद के साथ लिया जाना चाहिए | 

गुडुची के सेवन की मात्रा

यदि गुडुची के चूर्ण का सेवन कर रहे हैं तो एक दिन में एक ग्राम से कम ही इसकी मात्रा रखनी चाहिए | 

यदि इसका जूस ले रहे हैं तो 10 -15 ml एक दिन में लेना चाहिए | यह एक औषधि है इसलिए इसे बिना कारण नहीं लिया जाना चाहिए | एक महीने तक लगातार सेवन कर  लिया हो तो आवश्यक है कि इसे लेना बंद करें। 

उम्मीद है कि आप लोगों ने  भी इसका फायदा उठाया होगा | आप अपना अनुभव हमें बताएं ताकि ज्यादा से ज्यादा लोग इसे जान सकें और वो भी इसका लाभ उठाए | आपके द्वारा बताये गए अनुभव दूसरों तक इस लेख के द्वारा पहुँचेगा | 

कैसा रहा आपका अनुभव ?

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अमरुद के पत्ते के फायदे तथा उपयोग / Guava Leaves Benefits in Hindi https://healthysansaar.in/%e0%a4%85%e0%a4%ae%e0%a4%b0%e0%a5%81%e0%a4%a6-%e0%a4%aa%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%a4%e0%a5%87-%e0%a4%ab%e0%a4%be%e0%a4%af%e0%a4%a6%e0%a5%87/?utm_source=rss&utm_medium=rss&utm_campaign=%25e0%25a4%2585%25e0%25a4%25ae%25e0%25a4%25b0%25e0%25a5%2581%25e0%25a4%25a6-%25e0%25a4%25aa%25e0%25a4%25a4%25e0%25a5%258d%25e0%25a4%25a4%25e0%25a5%2587-%25e0%25a4%25ab%25e0%25a4%25be%25e0%25a4%25af%25e0%25a4%25a6%25e0%25a5%2587 https://healthysansaar.in/%e0%a4%85%e0%a4%ae%e0%a4%b0%e0%a5%81%e0%a4%a6-%e0%a4%aa%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%a4%e0%a5%87-%e0%a4%ab%e0%a4%be%e0%a4%af%e0%a4%a6%e0%a5%87/#comments Sat, 29 Aug 2020 08:25:07 +0000 https://healthysansaar.in/?p=292 अमरुद सर्दी के मौसम में मिलने वाला एक स्वादिष्ट फल है | अमरुद को भारत का देसी फल कहा जा सकता है | यह भारत के सभी प्रान्त में आसानी से उगाया जानेवाला पौधा है | अमरुद की तासीर ठंढी होती है | इस कारण कुछ लोग इस फल का Read more…

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अमरुद के पत्ते
अमरुद

अमरुद सर्दी के मौसम में मिलने वाला एक स्वादिष्ट फल है | अमरुद को भारत का देसी फल कहा जा सकता है | यह भारत के सभी प्रान्त में आसानी से उगाया जानेवाला पौधा है | अमरुद की तासीर ठंढी होती है | इस कारण कुछ लोग इस फल का फायदा नहीं उठा पातें |उनके लिए अमरुद के पत्ते की चाय एक अच्छा विकल्प है | जितनी पौष्टिकता अमरुद के फल में होती है उतनी ही पौष्टिकता इसके पत्ते में भी होती है | अमरुद के पत्ते के औषधीय गुणों के कारण आयुर्वेद में इसे विशेष स्थान प्राप्त है | 

अमरुद की पत्तियों में एंटी बैक्टीरियल और एंटी इंफ्लेमेटरी गुण होते हैं | इसमें कई प्रकार के एंटीऑक्सिडेंट्स जैसे पोलीफेनोल , कार्टेनोइड तथा फ्लवोनोइड्स होते हैं | अमरुद के पत्ते के फायदे को समझने के लिए हम इसमें मौजूद पोषक तत्वों पर नज़र डालते हैं | 

अमरुद की पत्तियों में मौजूद पोषक तत्व /Nutritional value of Guava Leaves in Hindi 

पोषक तत्वमात्रा प्रति 100 ग्राम
कार्बोहाइड्रेट7mg
स्टार्च6.3mg
प्रोटीन16.8mg
एमिनो एसिड8mg
विटामिन सी103.0mg
विटामिन बी14.80mg
कैल्शियम1660.0mg
आयरन13.50mg
मैग्नीशियम440mg
फास्फोरस360mg
पोटैशियम16mg
इस चार्ट से स्पष्ट है कि अमरुद के पत्तियाँ कैल्शियम , मैग्निसियम ,फ़ास्फ़रोस ,पोटैशियम ,आयरन, विटामिन C और विटामिन B की अच्छी श्रोत हैं |

अमरुद के पत्ते का उपयोग कैसे करें / How to use Guava  Leaves in Hindi  

अमरुद के पत्ते
अमरुद के पत्ते
  1. अमरुद की कोमल पत्तियों को चबा – चबा कर खाया जा सकता है | एक बार में दो पत्ते ही चबाने चाहिए | यह सबसे आसान और सर्वोत्तम तरीका है | मुँह की दुर्गन्ध दूर करने के लिए , दांत और मसूड़ों के दर्द से छुटकारा पाने के लिए और छाले से राहत के लिए यही तरीका अपनाना होता है | 
  1. हरी कोमल पत्तियों की उपलब्धता हमेशा नहीं होती | इसलिए अमरुद के पत्ते की चाय बनायी जाती है | अमरुद के पत्ते की चाय के लिए हरे और सूखे दोनों ही पत्ते प्रयोग किये जा सकते हैं | बाज़ार में सूखे हुए अमरुद की पत्तियों की चूर्ण मिलती है | 
  1. हरे अमरुद की पत्तियों से चाय बनाने की विधि 
  • एक कप चाय बनाने के लिए 2 अमरुद की हरी पत्तियाँ धो लें 
  • एक बर्तन में एक कप और एक चौथाई कप पानी उबलने को रखें 
  • उबलते पानी में पत्ते के छोटे छोटे टुकड़े कर के डाल दें 
  • माध्यम आंच पर 5 मिनट उबलने दें 
  • गैस बंद कर के बर्तन को ढक कर रख दें 
  • 10 मिनट बाद छानकर पी लें | 
अमरुद के पत्ते की चाय
  1. सूखे अमरुद की पत्तियों के चूर्ण से चाय बनाने की विधि 
  • एक कप चाय के लिए 2 अमरुद के सूखे पत्ते या 1/4 चम्मच अमरुद के पत्ते के चूर्ण /powder 
  • एक बर्तन में एक कप पानी उबालें 
  • गैस बंद कर बर्तन में पत्ते की चूर्ण डाल दें 
  • बर्तन को ढक कर रख दें 
  • 10 मिनट बाद छान कर पी लें | 

अमरुद के पत्ते तथा अमरुद के पत्ते की चाय के फायदे / Benefits of Guava Leaves and Guava Leaf Tea 

डायबिटीज में फायदेमंद 

अमरुद के पत्ते में एंटी डायबिटिक गुण होते हैं | इसके पत्ते में मौजूद फेनोलिक कंपाउंड्स रक्त में ग्लूकोज के लेवल को नियंत्रित करता है | एक अध्ययन में देखा गया कि जब type 2 diabetes के रोगियों को इसके पत्ते की चाय पिलाई गयी तो भोजन के बाद उनके रक्त में ग्लूकोज की  10% से ज्यादा की कमी थी | 

ह्रदय के लिए सेहतमन्द 

अमरुद की पत्तियां ह्रदय को कई प्रकार से स्वस्थ रखने में मदद करती हैं | इसमें मौजूद एंटी ऑक्सीडेंट्स और विटामिन्स हार्ट को free radicals के कारण होने वाले नुकसान से बचाते हैं | यह चाय हाई ब्लड प्रेशर को लो करता है | bad  cholesterol LDL को कम करता है तथा good cholesterol HDL को बढ़ाता है | इस चाय के सेवन से ट्राइग्लिसराइड के लेवल में भी कमी देखी गयी है | 

डायरिया ठीक करता है 

अमरुद के पत्ते की चाय में एंटी माइक्रोबियल गुण होते हैं | हमारे आँत में मौजूद उन हानिकारक बैक्टीरिया को यह ख़त्म करता है जिनके कारण डायरिया होती है | यह E. Coli बैक्टीरिया को ख़त्म करने के साथ -साथ इससे होने वाली अन्य परेशानियों को भी नियंत्रित करता है | इस चाय को पीने से दस्त के दौरान पेट में उठने वाले मरोड़ भी ठीक होते हैं |

सर्दी खांसी में फायदेमंद 

कई बार सर्दी खांसी के दौरान श्वास नली में जलन और सूजन आ जाती है | यह स्थिति ब्रोंकाइटिस कहलाती है | इसके पत्ते में एंटी इंफ्लेमेटरी गुण होते हैं | जिस कारण यह सूजन कम करता है | इससे बार- बार आने वाली खांसी में भी आराम मिलता है | 

वजन घटाने में सहायक 

अमरुद की पत्तियों में मौजूद बायोटिक कंपाउंड्स कार्बोहायड्रेट के अवशोषण को रोकते हैं | इससे शरीर में ग्लूकोज की मात्रा कम रहती है |यह चाय कॉम्प्लेक्स कार्बोहायड्रेट को शुगर में बदलने से रोककर वजन कम करने में मदद करती है | 

दांत दर्द ,मसूड़ों के दर्द और छाले में आराम 

अमरुद के पत्ते चबाने से दाँत दर्द में आराम मिलता है | यह दांतो में सड़न होने से भी बचाता है | इसमें विटामिन C और फ्लवोनोइड्स होते हैं जो मसूड़ों को स्वस्थ रखने में मदद करते हैं | इसके कोमल पत्तियों को चबाने से मुंह की दुर्गन्ध दूर होती है तथा छाले में भी आराम मिलता है |

अच्छी नींद लाने मे मदद 

अमरुद के पत्ते में मौजूद मैग्नीशियम के कारण दिमाग शांत रहता है और नींद भी अच्छी आती है | अच्छी नींद का कारण यह भी है कि इसे पीने के बाद बार- बार पेशाब नहीं आती है | जिससे नींद में खलल नहीं पड़ती है | 

लिवर के लिए सेहतमंद 

अमरुद के पत्ते में Aspartate  Aminotransferase (AST)नमक एंजाइम को कम करने की क्षमता होती है | यह एंजाइम लिवर में ज्यादा होता है | एक स्वस्थ शरीर में AST लेवल हमेशा कम होता है | AST के बढ़ने से लिवर ख़राब होता है | इस तरह इसके पत्ते से बानी चाय लिवर को स्वस्थ रखने में मदद करता है | 

आयरन की कमी को पूरा करता है 

इसमें आयरन की मात्रा अच्छी होती है | 100 ग्राम पत्ते में 13.50 mg आयरन होता है | शरीर में हिमोग्लोबिन की मात्रा सही रखने के लिए आयरन की जरूरत होती है | शरीर में hb सही होने से ऑक्सीजन की मात्रा की कमी नहीं होती | 

स्पर्म की संख्या में वृद्धि 

अमरुद की पत्तियां पुरुषों की प्रजनन क्षमता को बढ़ाने में सक्षम पाए गए हैं | इसमें मौजूद एंटी ऑक्सीडेंट्स sperm toxicity को कम करते हैं ,जिससे स्वस्थ स्पर्म का निर्माण होता है | इस तरह स्पर्म की वृद्धि करने में यह सक्षम है |

 घाव और इन्फेक्शन में फायदेमंद

अमरुद की पत्तियों में एंटीबैक्टीरियल प्रॉपर्टी होती हैं | इसके पत्ते को पीसकर घाव पर लगाने से घाव जल्दी भर जाता है | यह इन्फेक्शन होने से भी बचाता है | अमरुद की पत्तियों के चूर्ण को भी घाव पर पेस्ट बना कर लगा सकते हैं | 

पाचन तंत्र को मजबूत बनाता है 

अमरुद की पत्तियाँ पाचनतंत्र के लिए अच्छे माने जाते हैं | इसकी चाय पीने से पेट में इन्फेक्शन का खतरा नहीं रहता | अमरुद की पत्तियां उन गैस्ट्रिक एन्ज़ाइम्स को बनाने में मदद करती हैं जिनसे पाचन क्रिया बेहतर होती हैं | अमरुद की पत्तियों में मौजूद फ्लवोनोइड्स gastric ph value को बढाकर  पेट में  अल्सर होने की सम्भावना को कम करता है 

बुखार में लाभदायक

अमरुद के पत्ते को हर तरह के वायरल इन्फेक्शन में फायदेमंद देखा गया है | यह प्लेटलेट्स बढ़ाने में मदद करता है | खासकर डेंगू में प्लेटलेट्स की कमी हो जाती है ,उस समय यह चाय पीना लाभदायक सिद्ध होता है | अमरुद की पत्तियों में quercetin नामक फ्लवोनोइड्स होते हैं जो वायरल इन्फेक्शन के दौरान होनेवाले नुकसान से बचाते हैं | 

कैंसर से बचाव 

अमरुद की पत्तियों में मौजूद एंटीऑक्सिडेंट्स के कारण इसमें एंटी कैंसर गुण होते हैं | यह चाय कैंसर सेल के ग्रोथ को रोकने में भी सक्षम है | इसमें मौजूद एंटीऑक्सिडेंट्स फ्री रैडिकल्स को कम करते हैं जिससे कैंसर का चांस नहीं रहता | 

मासिक धर्म के दौरान होनेवाले दर्द में आराम  

एक शोध में पाया गया कि जब महिलाओं को 6 mg अमरुद के पत्ते का एक्सट्रेक्ट दिया गया तो उनमें मासिक धर्म के दौरान होने वाले दर्द में कमी आयी | यहाँ तक कि इसका रिजल्ट पेन किलर से भी अच्छा देखा गया | 

रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाता है 

अमरुद की पत्तियों में अच्छी मात्रा में विटामिन C होती हैं | इम्युनिटी को स्ट्रांग बनाने वाला घटक विटामिन C ही होता है | इसमें विटामिन B 3 और B 6 भी होते हैं जिनसे मस्तिष्क एक्टिव रहता है | फलस्वरूप ब्लड सर्कुलेशन अच्छा रहता है |  

अमरुद की पत्तियों के फायदे त्वचा और बालों के लिए /Guava Leaves Benefits For Skin and Hair

अमरुद का पौधा

मुहांसे ठीक करता है 

मुहांसो से छुटकारा पाने के लिए अमरुद की पत्तियों को पीसकर मुहांसो पर लगाये जाते हैं | इसमें एन्टीबॅक्टेरियलऔर एंटी इंफ्लेमेटरी गुण होते हैं जिस कारण मुहांसे ठीक होते हैं | 

खुजली में आराम 

अमरुद की पत्तियों में इन्फेक्शन दूर करने के गुण होते हैं | खुजली जहाँ हो रही हो वहाँ अमरुद की पत्तियों को पीसकर या पत्ते के चूर्ण को पेस्ट बनाकर लगाने से खुजली में आराम मिलता है | 

त्वचा में कसावट 

अमरुद की पत्तियों के चाय को स्किन टोनर की तरह भी प्रयोग किया जाता है | इसमें विटामिन C और एंटी ऑक्सीडेंट्स होते हैं जो स्किन को झुर्रियों से बचाते हैं | इसे लगाने से त्वचा में कसावट आती है | इसके लिए अमरुद के पत्ते की चाय से फेसवाश किया जाता है | फेसवाश के आधे घंटे बाद ठंडे पानी से धो लें | इससे पिम्पल्स भी नहीं आते और त्वचा में भी कसावट रहती है | 

झड़ते बालों के लिए फायदेमंद

अमरुद की पत्तियों को पानी में उबाउलकर चाय बना लें | इस चाय को बालों की जड़ो में  लगाएँ | 15 मिनट बाद शैम्पू कर लें | यह झड़ते बालों को रोकने में फायदेमंद होता है | इसके लिए ताज़ी हरी पत्तियों का प्रयोग  ही  ज्यादा अच्छा होता है |इसे लगाने से स्कैल्प के इन्फेक्शन भी ठीक होते हैं | इसमें मौजूद एंटीऑक्सिडेंट्स और विटामिन्स के करण बाल मुलायम और चमकदार हो जाते हैं | इसका प्रयोग करके कई हेयर प्रोडक्ट भी बनाये गए हैं | 

अमरुद के पत्ते के नुकसान /Side Effects of Guava Leaf Tea 

अमरुद की पत्तियाँ औषधीय गुणों से भरपूर होती हैं | फिर भी ज्यादा मात्रा में सेवन की जाये तो इसका नुकसान होता है | चाय बनाते समय ज्यादा पत्तियों का प्रयोग नहीं किया जाना चाहिए |   अमरुद की दो कोमल पत्तियां ही एक दिन में चबा कर खानी चाहिए | ज्यादा खा लेने से गैस और पेट में जलन की समस्या होती है | 

गर्भवती महिलाओं को अमरुद के पत्ते या अमरुद के पत्ते की चाय का सेवन नहीं करना चाहिए | उन्हें किसी भी हर्बल चाय का सेवन  करने से पहले डाक्टरी सलाह लेनी चाहिए | 

अगली बार दांत या मसूड़ों में दर्द हो तो अमरुद की पत्तियाँ चबाना न भूलें | बुखार होने पर अमरुद के पत्ते की चाय का सेवन अवश्य करें | 

इससे सम्बंधित कोई प्रश्न हो तो कमेंट सेक्शन में जाकर पूछ सकते हैं | यह लेख अपने दोस्तों से शेयर करें जिससे वह भी अमरुद की पत्तियों का फायदा उठा सकें | 

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अश्वगंधा के फायदे , नुकसान तथा उपयोग https://healthysansaar.in/%e0%a4%85%e0%a4%b6%e0%a5%8d%e0%a4%b5%e0%a4%97%e0%a4%82%e0%a4%a7%e0%a4%be-%e0%a4%ab%e0%a4%be%e0%a4%af%e0%a4%a6%e0%a5%87-%e0%a4%a8%e0%a5%81%e0%a4%95%e0%a4%b8%e0%a4%be%e0%a4%a8/?utm_source=rss&utm_medium=rss&utm_campaign=%25e0%25a4%2585%25e0%25a4%25b6%25e0%25a5%258d%25e0%25a4%25b5%25e0%25a4%2597%25e0%25a4%2582%25e0%25a4%25a7%25e0%25a4%25be-%25e0%25a4%25ab%25e0%25a4%25be%25e0%25a4%25af%25e0%25a4%25a6%25e0%25a5%2587-%25e0%25a4%25a8%25e0%25a5%2581%25e0%25a4%2595%25e0%25a4%25b8%25e0%25a4%25be%25e0%25a4%25a8 https://healthysansaar.in/%e0%a4%85%e0%a4%b6%e0%a5%8d%e0%a4%b5%e0%a4%97%e0%a4%82%e0%a4%a7%e0%a4%be-%e0%a4%ab%e0%a4%be%e0%a4%af%e0%a4%a6%e0%a5%87-%e0%a4%a8%e0%a5%81%e0%a4%95%e0%a4%b8%e0%a4%be%e0%a4%a8/#respond Mon, 10 Aug 2020 11:25:49 +0000 https://healthysansaar.in/?p=178 अश्वगंधा एक आयुर्वेदिक जड़ी बूटी है | इसे औषधि के तौर पर हजारों वर्षों से इस्तेमाल किया जाता जा रहा है | चरक संहिता में  भी इसका जिक्र  है | इसका लैटिन नाम Withania somnifera है | इसे winter cherry भी कहते हैं | इसकी जड़ और पत्तियों से अश्व Read more…

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अश्वगंधा एक आयुर्वेदिक जड़ी बूटी है | इसे औषधि के तौर पर हजारों वर्षों से इस्तेमाल किया जाता जा रहा है | चरक संहिता में  भी इसका जिक्र  है | इसका लैटिन नाम Withania somnifera है | इसे winter cherry भी कहते हैं | इसकी जड़ और पत्तियों से अश्व के मूत्र जैसी गंध आती है | इस कारण इसे अश्वगंधा का नाम दिया गया |आयुर्वेद के अनुसार इसके सेवन से अश्व जैसी ताकत और यौन शक्ति मिलती है |

भारत में यह राजस्थान , हरियाणा , उत्तर प्रदेश , गुजरात , महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश में मुख्य रूप से उपजाए जाते हैं |मध्यप्रदेश में इसकी खेती करीब 5000 acre में की जाती है |

अश्वगंधा को एडाप्टोजेन प्लांट कहते हैं | एडाप्टोजेन प्लांट अर्थात स्ट्रेस रिलीफ प्लांट | इसकी तासीर खुश्क और गर्म होती है | इसका सेवन शरीर में पित्त को बढ़ाता है तथा कफ और वात दोष को कम करता है | 

अश्वगंधा के अद्भुत फायदे ,नुकसान तथा उपयोग
अश्वगंधा की जड़

अश्वगंधा के अद्भुत फायदे 

1. अश्वगंधा के फायदे पुरुषों के लिए  Ashwagandha for men 

पुरुष बाँझपन दूर करने के लिए   

पुरुष बाँझपन का मुख्य कारण स्पर्म की संख्या , संरचना और उनकी गतिशीलता में कमी होती है | अश्वगंधा में उपस्थित एमिनो एसिड ,आवश्यक लवण , एंटीऑक्सिडेंट्स , विटामिन A ,C और E स्पर्म की गुणवत्ता को सुधारने में मदद करते हैं | एक अध्ययन में पाया गया कि तीन महीने तक ashwagandha root extract का सेवन करने से स्पर्म की गुणवत्ता में improvement हुई | स्पर्म की संख्या , वीर्य की मात्रा तथा स्पर्म की गतिशीलता में 50% से अधिक की वृद्धि देखी गयी | 

पुरुषों को बेहतर सेक्स ड्राइव के लिए 

प्राचीन समय से ही काम उत्तेजना को बढ़ाने के लिए इसका प्रयोग किया जाता रहा है | कामसूत्र में भी इसका उल्लेख है | जब पुरुष अश्वगंधा लेना शुरू करते हैं तो उनके शरीर में nitric oxide की वृद्धि होती है | परिणामस्वरूप bloodvessels द्वारा ब्लड का प्रवाह reproductive organ तक सुचारु रूप से होता है | इससे सेक्स ड्राइव तथा संतुष्टि दोनों में वृद्धि होती है | अध्ययन से यह भी पता चला है कि इससे erectile डिस्फ़ंक्शन का दोष भी दूर होता है |  

पुरुषों में टेस्टोस्टेरोन को बढ़ाने के लिए 

पुरुषों में 30 वर्ष की आयु के बाद टेस्टोस्टेरोन का स्तर स्वाभाविक रूप से कम होने लगता है | टेस्टोस्टेरोन की कमी से पुरुषों में बाल गिरना , मसल्स की कमी , डिप्रेशन , बोन मास की कमी , ब्रैस्ट का बढ़ जाना ,  यादाश्त तथा फोकस का ख़राब होना , स्पर्म का कम होना जैसे लक्षण दिखने लगते हैं | एक अध्ययन के अनुसार जब तीन महीने तक 300 mg ashwagandha root extract दिन में दो बार दिया गया तो उनके टेस्टस्टेरॉन हारमोन में वृद्धि देखी गयी |  

तनाव को दूर करने के लिए 

अश्वगंधा का सेवन एड्रेनल ग्लैंड को मजबूत बनाता है | एड्रेनल ग्लैंड से कोर्टिसोल हारमोन निकलता है | यह हारमोन  तनाव के लिए उत्तरदायी होता है | एक स्टडी के अनुसार जब 300mg ashwagandha root extract दिन में दो बार 60 दिन तक दिया गया तब 25% तक कार्टिसोल हारमोन में कमी आयी | फलस्वरूप तनाव में भी कमी आ गयी | जब तनाव अधिक होता है तो BP बढ़ जाता है | जिससे धमनियों में रक्त का प्रवाह बाधित होता है | रक्त रिप्रोडक्टिव ऑर्गन तक पहुँच नहीं पाता और इससे नपुंसकता (इम्पोटेंसी )बढ़ती है | 

सेक्स हारमोन बढ़ाने के लिए 

एक अध्ययन में पाया गया कि इसके सेवन से टेस्टोस्टेरोन और लिउटीनीज़िंग हारमोन में काफी वृद्धि होती है | इसके सेवन से follicle stimulating hormone और prolactin के लेवल को कम किया जा सकता है |इन हारमोन के ज्यादा होने का अर्थ है स्पर्म का कम बनाना | ashwagandha प्लाज्मा मेटाबॉलिट्स और सेक्स हारमोन के बीच संतुलन को बढ़ावा देता है | 

पुरुषों की सहनशक्ति बढ़ाने के लिए 

Cardio respiratory endurance का अर्थ है किसी भी गतिविधि को करने के लिए बेहतर सहनशक्ति | इसके लिए मांसपेशियों को काफी ऊर्जा की आवश्यकता होती है | अश्वगंधा का सेवन दैनिक जीवन में कार्य करने की क्षमता को बढ़ाता है | यह sexual endurance को भी बढ़ाने में मदद करता है | 

स्पर्म की क्षति को रोकने के लिए  

इसमें मौजूद एंटीऑक्सिडेंट्स स्पर्म की क्षति होने से रोकते हैं | यह स्पर्म सेल में फैट के लेयर्स के ऑक्सीडेशन को रोकता है जिससे स्पर्म डैमेज नहीं हो पता | 

इस तरह अश्वगंधा का सेवन पुरुषों को सेक्स सम्बन्धी सभी समस्याओं से मुक्ति दिलाता है | इसे सेक्स टॉनिक भी कहा जा सकता है |

2. अश्वगंधा के फायदे महिलाओं के लिए   Ashwagandha for women  

महिलाओं में फर्टिलिटी के लिए फायदेमंद 

महिलाओं में इनफर्टिलिटी का अर्थ है गर्भ धारण नहीं करना तथा बार-बार गर्भ का गिर जाना | इसका मुख्य कारण है हारमोन इम्बैलेंस | जिससे अंडाशय में एग या तो बनता ही नहीं है या जो एग बनते  हैं वो स्वस्थ नहीं होते | अश्वगंधा में मौजूद तत्व , एमिनो एसिड, पेप्टाइड्स तथा लिपिड्स एंडोक्राइन सिस्टम को सुधारते हैं  | यह थाइरोइड ग्लैंड और एड्रेनल ग्लैंड की एक्टिविटी को सामान्य करने में मदद करता है | Follicle stimulating hormone और luteinizing hormone के बीच सामंजस्य बैठाने में यह अहम भूमिका निभाता है | इसमें आयरन की मात्रा अच्छी होती है | इसके सेवन से  खून की कमी पूरी होती है | कभी कभी खून की कमी के कारण भी महिलायें गर्भ धारण नहीं कर पाती | 

PCOS में फायदेमंद   

PCOS का अर्थ है polycystic ovarian syndrome. PCOS के कारण महिलाओं में मासिक धर्म की अनियमितता , फर्टिलिटी तथा उनके अपीयरेंस में बदलाव दीखता है | हारमोन इम्बैलेंस के कारण अंडाशय में सिस्ट बन जाते हैं | माँस , रक्त और चरबी जब कफ के साथ मिलकर गोलाकार गाँठ की आकृति ले लेते हैं तो उसे सिस्ट कहा जाता है | वात और कफ दोष के बिगड़ने से सिस्ट बनता है | 

अश्वगंधा हारमोन को संतुलित करता है तथा थाइरोइड के कार्य को सुधारता है | यह एड्रेनल फंक्शन को सपोर्ट करता है तथा कोर्टीसोल  हारमोन के स्तर को सामान्य बना कर रखता है | इससे बॉडी में इन्सुलिन का लेवल भी मेन्टेन रहता है | इसके जड़ में tryptophan होता है | यह सेरोटोनिन का मुख्य तत्व है | सेरोटोनिन को मूड लिफ्टिंग हारमोन भी कहते हैं | यह मासिक धर्म को नियमित करता है तथा मेंस्ट्रूअल   पेन को भी कम करता है | 

मेनोपॉज के समय फायदेमंद 

मेनोपॉज़ के दौरान हारमोन असंतुलित होता है | इस कारण महिलाओं में उत्तेजना ,बेचैनी ,अनिद्रा, एंग्जायटी जैसी अनेक परेशानियां शुरू हो जाती है | इस परिस्थिति में अश्वगंधा लेना फायदेमंद रहता है | यह एंडोक्राइन सिस्टम पर कार्य करता है तथा हारमोन के श्राव को सामान्य करता है | 

काम उत्तेजना को बढाता है  

यह एक विशेष कारण है जिस कारण ashwagandha को मैजिकल हर्ब कहा जाता है | यह तनाव को कम कर मूड को अच्छा करता है | शरीर में खून के बहाव को बढ़ाता  है , जिससे काम उत्तेजना बढ़ती है | 

भूलने की समस्या को डिले करता है 

उम्र बढ़ने के साथ साथ याददाश्त का कम होना आम बात है | ब्रेन सेल के डिजनरेशन के कारण ऐसा होता है | अश्वगंधा का सेवन किया जाये तो याददाश्त से जुड़ी सभी परेशानी दूर हो जाती  है | इसे नर्व सेल का पोटेंशियल हीलर कहते हैं | 

बालों को स्वस्थ रखता है  

तनाव कम होने से बाल भी कम झड़ते हैं | अश्वगंधा का सेवन पाचन को सुधारता है | पोषक तत्वों की कमी को पूरा कर शरीर को स्वस्थ करता है |जिससे बाल भी स्वस्थ हो जाते हैं | इसका सेवन मेलनीन के लॉस से भी बचाता है |यह हेयर फॉलिकल को स्टिमुलेट  कर बाल मजबूत और लम्बा करता है | यह डैंड्रफ को भी दूर करता है | 

एजिंग डिले करता है 

Ashwagandha में मौजूद एंटीऑक्सीडेंट एजिंग को डिले कर लम्बे समय तक युवा बनाये रखता है | इसमें एंटी बक्ट्रियल तथा एंटी माइक्रोबियल गुण होते हैं जिससे वैजिनल इन्फेक्शन भी ठीक होता है | 

3. अश्वगंधा के फायदे बच्चों के लिए   Ashwagandha for kids  

  • यह बच्चों के लिए भी सेफ है | डॉक्टर की सलाह लेकर इसे बच्चों को भी खिलाया जा सकता है | Teenagers एडल्ट के तरह ही इसे रियेक्ट करते हैं | बच्चों  में निम्न तरीके से यह फायदा पहुँचाता है|
  • Wbc और platelets को बढ़ाकर इम्युनिटी बढ़ाता है | शरीर को एंटीबाडी डेवेलप करने में मदद करता है।
  • न्यूरॉन्स के ग्रोथ को स्टिमुलेट कर मेमोरी को शार्प करता है | लॉन्ग टर्म मेमोरी के लिए भी यह फायदेमंद है 
  • इसमें मौजूद पोषक तत्व खून की कमी पूरी कर बच्चों को ऊर्जावान बनाये रखते हैं | जिन बच्चों का वजन ज्यादा है उनकी भूख को शांत कर वजन कम करता है | 
  • टीनएजर्स में एंग्जायटी की शिकायत बढ़ती जा रही है | यह बच्चों में स्ट्रेस कम करने की क्षमता रखता है | 
  • इसका सेवन बच्चों को अच्छी नींद लेने में भी मदद करता है | 
  • एंटीबैक्टीरियल और एंटी माइक्रोबियल  गुण के कारण यह बच्चों को बीमार होने से बचाता है
  • इसका सेवन बच्चों की लम्बाई बढ़ाने में मदद करता है | 

4. अश्वगंधा मांसपेशी की शक्ति सुधारने में मददगार 

एक अध्ययन में 8 सप्ताह के लिए 300mg ashwagandha root extract supplement दिन में दो बार gym जाने वाले युवकों को दिया गया | 8 सप्ताह बाद बेंच प्रेस और लेग एक्सटेंशन एक्सरसाइज में इम्प्रूवमेंट देखी गयी | एक्सरसाइज के बाद रिकवरी टाइम में भी कमी देखी  गयी | arm  और chest  पर muscle mass भी बढ़ा हुआ पाया गया | इस तरह इसके सेवन से मांसपेशी की संरचना और ताकत में improvement देखने को मिली | 

5. वजन नियंत्रित करने में मदद 

इसमें एंटीऑक्सीडेंट होते हैं जो मेटाबोलिज्म को बढ़ा देते हैं | इससे सूजन में कमी आती है तथा शरीर में जमा फैट भी बर्न होता है | यह तनाव और चिंता को कम कर भोजन की तीव्र इच्छा में कमी लाकर वजन कम करता है | वजन नियंत्रित रखने के लिए संतुलित आहार और नियमित व्यायाम भी जरूरी है |  

6. ह्रदय रोग में लाभदायक 

अश्वगंधा में एंटी ऑक्सीडेंट और एंटी इन्फ्लैमटरी गुण होते हैं | इसके सेवन से ह्रदय की मांसपेशियाँ मजबूत बनती हैं | बैड कोलेस्टेरोल LDL तथा Triglyceride के लेवल में भी कमी आती है | इस तरह यह ह्रदय से जुड़ी  समस्याओं से बचाकर ह्रदय को स्वस्थ रखता है | 

7. अच्छी नींद लाने में मदद  

जापान की एक यूनिवर्सिटी द्वारा किये गए रिसर्च में पाया गया कि अश्वगंधा के पत्तों में triethylene glycol नामक एक कंपाउंड होता है जो गहरी नींद लाने में मदद करता है | डॉक्टर की सलाह पर नींद के लिए इसका सेवन किया जा सकता है | 

8. तनाव तथा एंग्जायटी को कम करने में मदद 

यह तनाव तथा एंग्जायटी को शांत करने में बहुत मददगार है | खासकर भीड़ वाले जगहों पर होनेवाली एंग्जायटी को शांत करता है | यह कोर्टिसोल हॉर्मोन अर्थात स्ट्रेस हार्मोन में कमी कर एंग्जायटी को शांत करता है |

9. डायबिटीज में लाभदायक 

आयुर्वेद में लम्बे समय से डायबिटीज के उपचार के लिए अश्वगंधा का प्रयोग किया जाता रहा है | इसकी ह्य्पोग्ल्य्सिमिक प्रॉपर्टीज रक्त में ग्लूकोज  के स्तर को कम कर देता है | एक अध्ययन में पाया गया कि चार सप्ताह तक इसका सेवन करने से फास्टिंग और भोजन उपरांत दोनों के शुगर स्तर में कमी आयी | इसके सेवन से इन्सुलिन की मात्रा बढ़ती है तथा माँसपेशियों में इन्सुलिन सेंसिटिविटी भी बढ़ती है | 

10. अश्वगंधा थाइरोइड में फ़ायदेमंद 

थाइरोइड ग्लैंड से थायरोक्सिन हारमोन T4 निकलता है | शरीर में इस हारमोन की कमी होने से TSH का लेवल बढ़ जाता है | TSH का बढ़ना हाइपोथायरायडिज्म  कहलाता है | हाइपोथयरॉइड के रोगी को जब अश्वगंधा का सेवन कराया जाता है तो उनके TSH लेवल में कमी आती है | ऐसा इसलिए होता है क्योंकि इसके सेवन से थाइरोइड ग्लैंड का फंक्शन सही होने लगता है | जिससे T4 का सेक्रेशन बढ़ जाता है | जीवन शैली में सुधार , परहेज और अश्वगंधा का सेवन पूर्ण रूप से ह्य्पोथयरॉइड को ठीक कर देता है | 

11. आँखों की बीमारी में फ़ायदेमंद  

हैदराबाद के कुछ वैज्ञानिकों ने इसका प्रयोग मोतियाबिन्द के लोगो पर किया | देखा गया कि इसका सेवन मोतियाबिंद को बढ़ने से रोकने में सफल रहा | इसमें मौजूद एंटीऑक्सीडेंट और साइटोप्रोटेक्टिव गुण के कारण ऐसा हुआ | 

12. रूमेटिड आर्थराइटिस में फ़ायदेमंद 

इसमें रोगी को जोड़ों में दर्द तथा सूजन रहता है | इसका प्रभाव शरीर के सभी अंगों पर पड़ता है | अश्वगंधा में एंटी इन्फ्लैमटरी गुण होते हैं | इसके सेवन से सूजन और दर्द दोनों में आराम मिलता है | इस बीमारी की चिकित्सा के लिए डाक्टरी इलाज़ भी जरूरी है | 

13. इन्फेक्शन में लाभदायक 

Ashwagandha का प्रयोग बैक्टीरियल इन्फेक्शन में सफल पाया गया है | एक सफल परीक्षण में इसे आँत सम्बन्धी संक्रमण तथा फेफड़ों से सम्बंधित संक्रमण में सकारात्मक रूप से प्रभावी पाया गया | इसमें मौजूद एंटीबैक्टीरियल प्रॉपर्टी के कारण ऐसा हुआ | 

14. अश्वगंधा कैंसर में फ़ायदेमंद 

इसका सेवन ट्यूमर सेल को पनपने से रोकता है | यह कीमोथेरेपी से होने वाले साइड इफेक्ट्स से भी बचाता है | यह कैंसर सेल को ख़त्म करने में भी योगदान देता है | इसे कैंसर के इलाज़ के साथ साथ बचाव के लिए भी प्रयोग किया जाता है | 

15. प्रतिरक्षा प्रणाली में सुधार 

इसके सेवन से ब्लड में हीमोग्लोबिन को बढ़ते हुए देख गया है | चूहों पर किये गए शोध में पाया गया कि चूहों में RBC और WBC दोनों में वृद्धि हुई | इस तरह इसका सेवन इम्युनिटी को बढ़ाने में पूर्ण रूप से मददगार साबित होता है | 

16. घाव भरने में उपयोगी 

यदि घाव गहरा न हो तो इसके जड़ के पॉवडर को पानी में मिलाकर लेप तैयार कर इसे घाव पर लगाते हैं | इससे आराम मिलता है तथा घाव भी जल्दी भर जाता है | किसी प्रकार की इन्फेक्शन की सम्भावना भी नहीं रहती | 

अश्वगंधा कब होता है  नुकसानदायक 

1. Ashwagandha की तासीर गर्म होती है | अधिक मात्रा में इसका सेवन पेट में गर्मी कर सकता है | जिससे दस्त, उलटी , गैस , अफ़रा जैसी समस्या हो सकती है | 

2. इसे लेते समय सावधानी रखने की सलाह दी जाती है क्योंकि यह सामान्य रूप से लिए जा रहे दवाइयों के साथ हस्तक्षेप करता है | यह दवाइयों का असर बढ़ा या घटा सकता है | 

3. गर्भवती महिलाओं को  इसका सेवन नहीं करने की सलाह दी जाती है | इसमें गर्भ गिराने वाले गुण होते हैं |

4. नींद लाने वाली दवाइयों के साथ इसका सेवन वर्जित है क्योंकि यह उन दवाइयों का असर घटा या बढ़ा सकता है | 

5. ऑटो इम्यून डिजीज वाले लोगों को इसका सेवन नहीं करना चाहिए | अन्यथा WBC के बढ़ने से उनकी समस्या बढ़ जाएगी 

6. डायबिटीज की दवाइयों के साथ इसे लेने से रक्त में शुगर का लेवल सामान्य से कम हो सकता है , इसमें शुगर लेवल कम करने के गुण होते हैं | 

7. हाई ब्लड प्रेशर की दवाइयों के साथ इसका सेवन नुकसानदायक होता है | 

8. थाइरोइड की दवाइयों के साथ भी इसका सेवन नुकसानदायक होता है | यह अपने आप में दवाई है | यदि ह्य्पोथयरॉइड की मेडिसीन के साथ इसे लेते हैं तो मुमकिन है TSH लेवल सामान्य  से नीचे चला जाये |

अश्वगंधा के उपयोग का तरीका 

  1. अश्वगंधा की टेबलेट और कैप्सूल बाजार में उपलब्ध है | उस पर बताये गए डोज़ के अनुसार इसका सेवन किया जा सकता है | 
  1. अश्वगंधा की जड़ और पॉवडर बाजार में आसानी से उपलब्ध है | बढ़िया क्वालिटी चाहिए तो ऑनलाइन मंगवाया जा सकता है | 
  1. इसके पॉवडर को गुनगुने दूध और पानी के साथ लिया जाता है | दूध के साथ लेने से यह पुष्टि वर्धक होता है |एक चम्मच पॉवडर दूध के साथ लेते हैं | एक चम्मच पॉवडर को पानी के साथ गरम करके चाय बनायी जाती है |
  1. जड़ के टुकड़े का गर्म पानी के साथ औषधि तैयार किया जाता है | इसके लिए एक लीटर गर्म पानी को उबालते हैं | पानी को गैस से उतार कर 50ग्राम इसका जड़ इसमें डाल देते हैं | ठंढा होने पर इसे कांच के बर्तन में रखकर फ्रीज में रख देते हैं | अब प्रतिदिन 50 ml इसका पानी पीते हैं | यह औषधि थायरॉइड की दवाइयों से भी ज्यादा असरदार होती है | 


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करी पत्ता के फायदे और उपयोग  Curry Leaf benefits in Hindi

करी पत्ता का नाम लेते ही दक्षिण भारत और सांभर का ध्यान आ जाता है | एक समय था जब यह केवल दक्षिण भारतीय व्यंजन का अभिन्न अंग हुआ करता था | अब यह भारत के सभी प्रांतों के रसोई का पसंदीदा मसाला बन चुका  है | करी पत्ता का बोटैनिकल नाम Murraya koenigii है | इसे मीठा नीम के नाम से भी जाना जाता है | 

करी पत्ता का पौधा देखने में आकर्षक होता है तथा हमारे घर आँगन की शोभा बढ़ाता है | यह पौधा आसानी से कहीं भी लगाया जा सकता है | इस पौधे पर वर्ष में एक बार सफ़ेद रंग के खुशबूदार फूल गुच्छे में आते हैं |यह हमारे भोजन को जायकेदार बनता है तथा हमारी सेहत का भी ख्याल रखता है | 

करी पत्ता के गुण 

करी पत्ता में कार्बोहायड्रेट , प्रोटीन , फाइबर , आयरन , फॉस्फोरस , मैग्नीशियम , फ्लवोनोइड्स और प्रचुर  मात्रा में कैल्शियम होते हैं |

इसमें कैरोटीन , निकोटिनिक एसिड , vitamin A , B , C , Vitamin B 2 तथा फोलिक एसिड होता है | | 

इसमें प्लांट कंपाउंड्स जैसे कि alkaloids , glycosides और phenolic  compounds होते हैं | 

यह एंटीबैक्टीरियल , एंटीफंगल , एंटीमाइक्रोबियल , एंटीइन्फ्लैमटॉरी तथा एंटीकार्सिनोजेनिक होता है |

करी पत्ता खाने के फायदे 

1. शरीर में खून की कमी पूरी करता है

शरीर में खून की कमी से एनीमिया रोग होता है | खून की कमी को दूर करने के लिए आयरन की आवश्यकता होती है | आयरन का अब्सॉर्प्शन तभी संभव है जब शरीर में फोलिक एसिड उचित मात्रा में हो | करी  पत्ता आयरन और फोलिक एसिड दोनों का बहुत अच्छा श्रोत है | इस कारण इसके नियमित सेवन से खून की कमी दूर हो जाती है | 

2 . हार्ट को स्वस्थ रखता है

करी पत्ता  में महानिम्बीन नामक alkaloid कंपाउंड होता है | इस कंपाउंड में बैड कोलेस्ट्रॉल LDL के लेवल  को कम करने की क्षमता होती है | यह कंपाउंड ट्राइग्लिसराइड लेवल को भी कम कर देता है | इसके अतिरिक्त यह ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस और फैट को भी कम करता है | इस तरह ह्रदय से जुड़ी परेशानी क दूर कर करी पत्ता ह्रदय को स्वस्थ रखता है | 

3. ब्लड में शुगर लेवल कम करता है 

करी पत्ता में कई प्रकार के एंटी डायबिटिक एजेंट होते हैं | ये शरीर में इन्सुलिन की गतिविधि को प्रभावित करते हैं | इससे खून में शुगर का लेवल कम हो जाता है | इसमें मौजूद फाइबर भी डायबिटिक लोगो के लिए फायदेमंद होता है | 

इसके लिए सुबह खाली पेट 8 -10 पत्ते पान की तरह चबाना चाहिए |

4. वजन कम करता है 

करी पत्ता में मौजूद carbazole alkaloid कंपाउंड वजन बढ़ने नहीं देता  है तथा कोलेस्ट्रॉल  के लेवल को भी नियंत्रित करता है | इसमें मौजूद फाइबर हमारे शरीर में जमा फैट और टॉक्सिन्स को बहार निकालने में मदद करता है | इसके लिए आवश्यक है  कि प्रतिदिन इसका सेवन किसी भी रूप में किया जाये|प्लेट में इसे छोड़ने की जगह इसे चबा कर खाने की आदत होनी चाहिए  

5. ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस  कम करता है 

करी पत्ता में अल्कॅलॉइड्स , ग्लाइकोसाइड्स , फेनोलिक कंपाउंड्स , लिनोलोल तथा अन्य प्लांट कंपाउंड्स होते हैं | ये कंपाउंड्स एंटी ऑक्सीडेंट की तरह हमारे शरीर में काम करते हैं | इनकी उपस्थिति ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस को कम कर देती है | इससे शरीर में फ्री रेडिकल्स की अधिकता  नहीं होती | फ्री रेडिकल्स की अधिकता कई बीमारियों का कारण बनता है | 

6. कब्ज़ , अनपच , दस्त तथा भारीपन दूर करता है 

पाचन सम्बन्धी सभी रोगों में करी पत्ता का सेवन लाभदायक होता है |इसमें लैक्सटिव गुण होते हैं | इसे चबा कर खाने से कब्ज़ दूर होता है |

पेट भारी लग रहा हो तो छांछ में इसका चूर्ण मिलाकर पीने से आराम मिलता है | इसका चाय भी इसमें फायदा पहुँचाता है | 

अनपच की स्थिति में भी इसका चाय पीना कारगर साबित होता है | यह digestive एंजाइम को स्टिमुलेट करता है तथा आँत में मसल्स के मूवमेंट को गति प्रदान करता है | इससे दस्त में भी आराम मिलता है | 

7. लिवर को डिटॉक्सिफाइ करता है 

करी पत्ता का चाय लिवर को डिटॉक्सिफाइ करने में मदद करता है | इसमें मौजूद एंटीऑक्सिडेंट्स फ्री रेडिकल्स का मुकाबला कर इसके प्रभाव को कम कर देते हैं | उपस्थित कंपाउंड लिवर से टॉक्सिन्स को बाहर निकाल देता है | 

8. बैक्टीरिया को दूर करता है 

 करी पत्ता में मौजूद प्लांट कंपाउंड्स में एंटी बैक्टीरियल गुण होते हैं | इसमें मौजूद linolol compound के कारण इसकी खुशबू होती है | इस कंपाउंड में बैक्टीरिया को मारने की क्षमता होती है | इस तरह यह हमें बैक्टीरियल इन्फेक्शन से बचाता है | 

9 . सूजन और दर्द कम करता है 

करी पत्ता में एंटी इन्फ्लैमटॉरी गुण होते हैं इस कारण यह सूजन में फायदेमंद होता है | मोच आ जाने पर इसका लेप लगाते हैं | इससे सूजन कम होती है तथा दर्द में भी आराम मिलता है | जली हुई त्वचा पर भी इसका लेप फायदेमंद होता है|घाव भी जल्दी भर जाता है तथा दाग भी नहीं रहता

10. त्वचा के लिए लाभदायक होता है 

करी पत्ता में एंटीबैक्टीरियल और एंटीफंगल गुण होते हैं | इसके पेस्ट को मुहांसे पर लगाने से यह ठीक हो जाता है तथा दाग भी नहीं रहता | करी पत्ता को पानी में उबालने से पानी में इसका गुण आ जाता है |  इस पानी से जब चेहरा धोते हैं  तो चेहरा साफ़ ,चमकदार तथा पिम्पल्स फ्री होता है |

नारियल तेल में गरम कर करी पत्ता का तेल बनाते हैं | यह तेल त्वचा को मुलायम , चमकदार तथा रंगत में साफ़ बनाता है |यह तेल इन्फेक्शन से भी बचाता है |

 11.आँखों के लिए फायदेमंद होता है 

इसमें मौजूद vitamin A के कारण यह आँखों के लिए लाभदायक होता है | यह मोतियाबिंद की समस्या को समय से पहले आने से  रोकता है |

12बालों को मजबूत बनाता है

करी पत्ता बालों  को कई प्रकार से फायदा पहुँचाता  है | यह फॉलिकल सेल के लिए बढ़िया होता है | यह फॉलिकल्स को स्टिमुलेट  करता है जिससे मजबूत और काले बाल उगते हैं  |करी पत्ता दो मुंहे बाल ,रूखे बाल , असमय सफ़ेद हो रहे बाल तथा डैंड्रफ जैसी परेशानियों को दूर करने में मदद करता है | 

इसके लिए करी पत्ता का तेल बनाया जाता है | इस तेल को बालों की जड़ों में लगाने से बाल काले , स्वस्थ और मजबूत बनते हैं  

13. छाती से बलगम दूर करता है

इसकी तासीर गर्म होती है | यह छाती और गले में जमे हुए बलगम को बाहर निकालता है | इसका सेवन मौसमी सर्दी और जुक़ाम से भी बचाता है | 8 – 10 पत्ते चबा चबा कर खाने से गले की खराश भी ठीक होती है |

 14 .कीमोथेरेपी  के साइड इफ़ेक्ट को कम करता है 

एक अनुसंधान में पाया गया कि करी पत्ते के सेवन से कीमोथेरेपी और रेडियो थेरेपी से होनेवाले साइड इफ़ेक्ट को कम किया जा सकता है |यह bone marrow  की रक्षा करता है तथा क्रोमोसोम्स को नुकसान पहुंचने  से बचाता है | इसमें एंटी कैंसर गुण भी होते हैं | इसके सेवन से फ्री रेडिकल्स कम बनते हैं जिससे कैंसर से बचाव होता है |

 15. इम्युनिटी बढ़ाता है  

इसमें vitamin C  तथा अन्य महत्वपूर्ण एंटी ऑक्सीडेंट होते हैं | इसके सेवन से खून की कमी पूरी होती है | हीमोग्लोबिन के सुधरने से शरीर में ऑक्सीजन की मात्रा  बढ़ती है , जिससे इम्युनिटी में सुधार होता है |

16. एंटी डिप्रेशन का कार्य करता है 

इसके 5 से 7 पत्ते को चबा कर खाया जाये तो एंग्जायटी में आराम मिलता है | इसमें मौजूद एंटी ऑक्सीडेंट ऑक्सीजन को बॉडी और ब्रेन तक अच्छे से पहुँचाता है | खून का बहाव सही होने से ब्रीदिंग अच्छी होती है तथा तनाव कम हो जाता है

17. कैल्शियम की कमी को दूर करता है 

करी पत्ता को कैल्शियम का पॉवरहाउस कहा जाता है |  100 ग्राम करी पत्ता में 810 मिली ग्राम कैल्शियम होता है | इसका नियमित सेवन कैल्शियम की कमी को पूरा करता है | 

करी पत्ता का नुकसान

करी पत्ता का नुकसान तब होता है जब इसका अधिक सेवन कर लिया जाये | कच्चा चबा कर खाया गया पत्ता गर्मी करता है | जब इसे ज्यादा खा लिया जाये तब इससे होने वाले नुकसान –

  • बेचैनी महसूस होती है |  
  • शरीर का तापमान बढ़ा हुआ लगता है |  
  • कभी कभी पेट में गर्मी हो जाती है और दस्त भी हो सकता है |
  • किसी को एलेर्जी हो तो साइड इफ़ेक्ट दिख सकता है | 

करी पत्ता का उपयोग 

  1. करी पत्ता को सुबह खाली पेट चबा कर खाते हैं | सर्दी के दिनों में इसे चबा कर खाना ज्यादा अच्छा होता है 
  1. इसकी चटनी बना कर भी उपयोग करते हैं  | 
  • नारियल , करी पत्ता , चना दाल , मिर्ची  और नमक को साथ में पीसकर चटनी बनाते हैं | 
  • मूंगफली , करी पत्ता ,नमक और  मिर्ची को पीसकर भी चटनी बनती है | 
  • कच्चा आम ,करी पत्ता , नमक और भुनी हुई लाल मिर्च को साथ में पीसकर भी चटनी बनती है 
  • अलसी के बीज  ,सूखे हुए करी  पत्ते और नमक के साथ ड्राई powder बनाते हैं तथा जब भी खाना हो तो पानी मिलाकर चटनी बना लिया जाता है | इसे लम्बे समय तक फ्रीज़ में स्टोर कर के रख सकते हैं | इस तरह अपनी पसंद की चटनी में इसे मिलाकर चटनी की पौष्टिकता बढ़ाई जा सकती है |
  1. इसको सुखाकर स्टोर करते हैं तथा विभिन्न सब्जियों और दालों में इसका उपयोग किया जाता है | सूखने के बाद भी इसकी खुशबू और स्वाद बरकरार रहता है | इसे धूप  में नहीं सुखाना चाहिए |
  1. इसे सूखाकर चूर्ण बनाया जाता है तथा इस चूर्ण को मसाले की तरह प्रयोग किया जाता है | दही और छांछ में भी इसे मिलाकर खाते हैं | 
  1. ताज़ी हरी पत्तियों से दाल, कढ़ी , सांभर , पोहा , उपमा , ढोकला इत्यादि को छौंक लगाते हैं  
  1. इसको पानी में उबालकर दस मिनट के लिए ढक  कर रख देते हैं | इस तरह करी पत्ता टी बनाकर इसका भरपूर फायदा उठाते हैं | 
  1. फेस पैक बनाने में इसका powder उपयोग में लाया जाता है | 
  1. मेंहदी भिंगोने के लिए जो चाय पत्ती  का पानी उबालते हैं उसमें 20 -25 पत्ते इसके डाल  दिए जाये तो मेंहदी के कारण बाल रुखा नहीं होता बल्कि रेशमी और चमकदार होता है | 
  1. 250 ग्राम नारियल तेल में एक कटोरी करी पत्ता मिलाकर धीमी आंच पर इसे गरम करते हैं , करीब 15  मिनट में हमारा तेल तैयार हो जाता है | ठंढा होने पर इसके पत्ते को छान कर अलग कर लेते हैं | इस तरह हमारा करी पत्ता तेल तैयार हो जाता है | यह बाल और त्वचा दोनों के लिए अच्छा होता है |

अपने दोस्तों को शेयर कर के इसके फायदे अवश्य बताएं | इससे सम्बंधित कोई प्रश्न या जानकारी हो तो मुझे भी कमेंट में बताएं | 

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